हमारे देश में लोक कलाओं की समृद्ध विरासत है। यहाँ हर क्षेत्र की अपनी लोक कला है जिसे यहाँ के लोक कलाकार प्रस्तुतियां देकर जीवंत रखते रहे हैं लेकिन तकनीकी के विकास के साथ इन लोक कलाओं की प्रस्तुतियां कम होती जा रही है जिससे कई लोक कलाएं विलुप्त होने की स्थिति में पहुँच गई। पारस इंडिया संस्था द्वारा विजन आईएएस के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत इन्हें पुनर्जीवन देने के लिए पिछले कई वर्षों से निरंतर प्रयास कर रही है इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए टाउन हॉल, उरई जिला – जालौन में दो दिवसीय लोकरंग सांस्कृतिक उत्सव का भव्य आयोजन किया गया जिसमें विभिन्न राज्यों के लोक कलाकरों द्वारा प्रस्तुति दी गई।
उत्सव के दूसरे व अंतिम दिवस पर लोक कलाकारों द्वारा मनमोहक प्रस्तुति दी गई जिसमें मुख्य आकर्षण रहा लाला हरदौल चरित्र पर आधारित नाटक की प्रस्तुति, लोक बाध्य कचहरी, घट नृत्य, कृष्ण भगवान को समर्पित मयूर नृत्य व फूलों की होली, शादी के अवसर पर खाना खाते समय गाए जाने वाले ज्योनार गारी, कछियाई नृत्य, बुन्देली लोक काव्य विधा रावला, ढीमराई नृत्य, नाथ समुदाय द्वारा नागिन डांस, छत्तीसगढ़ी नृत्य हमर परा तुम्हार पारा, बेटी बचाओ- बेटी पढाओ पर आधारित नाटक आज गर्भ में चीख रही बेटी हिंदुस्तान की, सोशल मीडिया के साइड इफेक्ट पर आधारित नाटक, सुआटा, स्वांग, झिंझिया व अन्य राज्यों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी गई। इस दौरान लगभग 10 राज्यों के लोक कलाकारों ने लोकनृत् य, लोक नाट्य, लोक गीत संगीत के माध् यम से अपने राज्य की संस् कृति की झलक मंच पर प्रस्तुत की। विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों ने अपनी कलात्मक प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को भाव विभोर किया तो वहीं दिल्ली, झाँसी के बच्चों ने पेंटिंग्स, पोस्टर्स, बुंदेलखंड की चितेरी कला व अन्य साज सज्जा के समानों की प्रदर्शनी लगाकर दर्शकों का ध्यान आकृष्ट किया एवं हस्तकला के प्रति जागरूक करने का काम किया।
पारस इंडिया संस्था के अध्यक्ष अरविन्द कुमार सिंह का कहना था की हमारी संस्था वर्तमान समय में देश के छः राज्यों दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में आर्ट एंड कल्चर, जागरूकता, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, काउन्सलिंग, जेंडर, आपदा प्रबंधन जैसे सामाजिक मुद्दे पर कार्य कर रही है, साथ ही संस्था विलुप्त हो रही भारतीय लोक कला व संस्कृति के संरक्षण, उन्नति, के लिए अलग अलग प्रान्तों में कार्यक्रमों का आयोजन भी करती रहती है, इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए लोकरंग सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन कर गांव, ब्लॉक, तहसील, जिला, राज्य और देश स्तरीय लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का उचित मंच प्रदान किया गया जिससे विलुप्त हो रही लोक कला व संस्कृति संरक्षित होगी, नई पीढ़ी में कला, साहित्य, संस्कृति के विषय पर ज्ञानवर्धन होगा और जन समुदाय में अपनी संस्कृति के प्रति रुचि भी बढ़ेगी साथ ही कलाकारों को एक पहचान मिलेगी।
लोकरंग सांस्कृतिक उत्सव में बड़ी संख्या में जिले के गणमान्य लोग सीडीओ भीम जी उपाध्याय जिला पंचायत अध्यक्ष डा घनश्याम अनुरागी , पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष एवं वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि विजय चौधरी साथ साथ आस पास के गाँव की महिलाएं, पुरुष एवं बच्चों ने अपनी उपस्थिति दर्ज
की।




