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रिपोर्ट: आयुष त्रिपाठी (गुरसरांय)

टहरौली। कस्बा में स्थित सिद्धनाथ आश्रम पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का समापन मंगलवार को सुदामा चरित्र के वर्णन के साथ हुआ। कथा वाचक पंडित पूजा किशोरी समाधिया जी के द्वारा सुदामा चरित्र का वर्णन किए जाने पर पंडाल में उपस्थित श्रोता भाव-विभोर हो गए। कथा वाचक ने सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है, तब तक मित्रता रहती है। जब स्वार्थ पूरा हो जाता है, मित्रता खत्म हो जाती है। उन्होंने कहा कि एक सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारकापुरी जाते हैं। जब वह महल के गेट पर पहुंच जाते हैं, तब प्रहरियों से कृष्ण को अपना मित्र बताते है और अंदर जाने की बात कहते हैं। सुदामा की यह बात सुनकर प्रहरी उपहास उड़ाते है और कहते है कि भगवान श्रीकृष्ण का मित्र एक दरिद्र व्यक्ति कैसे हो सकता है। कथा की आरती पारीछत श्रीमती मेघा राय एवं भूपेन्द्र राय ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद झांसी ललितपुर अनुराग शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पवन गौतम, ब्लॉक प्रमुख गुरसरांय टीकाराम पटेल आदि रहे। इस दौरान मंदिर के महंत सुखदेव दास त्यागी, यज्ञाचार्य पंकज शास्त्री पिपरा,यज्ञ मार्गदर्शक विमल शास्त्री पिपरा,आयुष त्रिपाठी, जितेंद्र राय,कैलाश सोनी, ओमी यादव,संतोष गोस्वामी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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