जीवन अजब गजब पहेली है। यदि जीवन को सही सत्य ढंग से जीना आ गया, तो वही सत्य बुद्धि-विवेक जीवन की सत्य सहेली है ।

डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

■ जीवन : सत्य और असत्य की अजब-गजब पहेली

जीवन अजब-गजब पहेली है: सत्य के मार्ग पर चलना ही जीवन की सच्ची विजय

यदि जीवन मन के असत्य भटकाव में भटक गया, तो उसकी छीछा लेदर हो ली है । जीवन अजब गजब पहेली है । हे मानव (नर-नारी , स्त्री-पुरुष) जीवन चेतना में विद्यमान मन के सत्य असत्य को, आत्मा के सत्य स्वरों द्वारा सुनते व मानते हुए चले और मन के असत्य को त्यागते हुए चले, तो जीवन की आनंदमयी विजय हो ली है । जीवन अजब गजब पहेली है । जीवन में चाहे जितना लिखो-लिखाओ, पढ़ो-पढ़ाओ स्वयं मानो तनिक भी नहीं, तो फिर सब कुछ व्यर्थ बेकार निरर्थक हो ली है । जीवन अजब गजब पहेली है । जीवन चेतना बार-बार मिलने का सत्य पता नहीं, इसलिए अति जागरूक, अति सजकता से , सत्य व पूर्ण बुद्धिमत्ता से, क्या सत्य आवश्यक है और क्या सत्य अनावश्यक है, यह प्रश्न है जीवन के सत्य को समझने के सामने , जिसने जीवन के सत्य को सत्य से समझ लिया, बस उसके ही जीवन की सत्य व पूर्ण विजय हो ली है । जीवन अजब गजब पहेली है । जीवन में स्वयं के भ्रमों का, घर परिवार , समाज (संसार) का असत्य बीच में आ जाता है, उसी से जीवन की दुर्गति हो ली है । जीवन अजब गजब पहेली है । जीवन सत्य की आत्म अनुभूति सत्य से मान लो, भइया तो फिर , जीवन परमेश्वर, परमपिता परम माता प्रदत्त मिली जीवन चेतना, पूर्ण परम सत्य सार्थक हो ली है । जीवन अजब-गजब पहेली है।जीवन अजब-गजब पहेली है: सत्य के मार्ग पर चलना ही जीवन की सच्ची विजय
विशेष विचार | आध्यात्मिक लेख
जीवन वास्तव में एक अजब-गजब पहेली है। यदि मनुष्य जीवन को सत्य के मार्ग पर, बुद्धि और विवेक के साथ जीना सीख ले, तो वही सत्य उसके जीवन की सच्ची सहेली बन जाता है। लेकिन जब जीवन मन के असत्य भटकाव में उलझ जाता है, तो उसकी दुर्गति निश्चित हो जाती है।
डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री” अपने विचारों में कहते हैं कि मानव—चाहे वह नर हो या नारी—यदि जीवन-चेतना में विद्यमान मन के सत्य और असत्य को आत्मा की सत्य वाणी से सुनते और मानते हुए चले तथा असत्य का त्याग करे, तो जीवन की आनंदमयी विजय सुनिश्चित हो जाती है।
उन्होंने कहा कि केवल लिखना-पढ़ना, कहना-सुनाना ही पर्याप्त नहीं है। यदि मनुष्य स्वयं अपने जीवन में उन बातों को नहीं अपनाता, तो समस्त ज्ञान व्यर्थ और निरर्थक बन जाता है।
लेख में यह भी बताया गया है कि जीवन बार-बार मिलने वाला नहीं है—यह सत्य निश्चित नहीं। इसलिए अत्यंत जागरूकता, सजगता और पूर्ण बुद्धिमत्ता के साथ यह समझना आवश्यक है कि कौन-सा सत्य जीवन के लिए आवश्यक है और कौन-सा अनावश्यक। जो व्यक्ति इस भेद को समझ लेता है, वही जीवन की सच्ची और पूर्ण विजय प्राप्त करता है।
डा० पीपर “शास्त्री” के अनुसार, कई बार स्वयं के भ्रम, घर-परिवार और समाज का असत्य जीवन के बीच आ जाता है, जिससे जीवन की दिशा भटक जाती है और व्यक्ति अपने लक्ष्य से दूर चला जाता है।
यदि मनुष्य जीवन की सत्य आत्म-अनुभूति को स्वीकार कर ले, तो परमेश्वर द्वारा प्रदत्त जीवन-चेतना पूर्ण रूप से सार्थक हो जाती है। यही जीवन का सत्यसार है।
निष्कर्ष रूप में उन्होंने कहा कि जीवन को सही ढंग से चलाना और उसका सही संचालन करना ही जीवन का वास्तविक सत्य है।
— डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

अर्थात सार युक्त अंश – जीवन में सब कुछ बेकार है । बस जीवन को सही ढंग से चलना चलाना व जीवन का सही ढंग से संचालन करना ही जीवन का सत्यसार है । जो कदम जीवन में सत्य-असत्य के चल लिए उन्हे पीछे मुड़कर देखना बेकार है । जो पग आगे बढ़ाना है, उन्हें जीवन में मिले अनुभव अनुभूतियों से पहिचान कर चलने में ही आगे कदम बढ़ाकर चलना पूर्ण और सत्य जीवन का सत्य सार है ।।

– डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

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