जिला अस्पताल के नए सीएमएस क्या खत्म कर पाएंगे दलालों का वर्चस्व?

 

डॉक्टरों के कक्ष में दलालों की मौजूदगी बनी समस्या

 

उरई (जालौन)। जिला चिकित्सालय उरई में लंबे समय से दलालों की गतिविधियां और डॉक्टरों द्वारा मरीजों को बाहर की दवाएं लिखने की शिकायतें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। अब अस्पताल के नए मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) के रूप में डॉ. आनंद उपाध्याय की नियुक्ति हुई है।

 

डॉ. उपाध्याय इससे पहले डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त चिकित्सालय, इटावा में वरिष्ठ परामर्शदाता के पद पर कार्यरत थे। उनकी नियुक्ति से पहले, जिला अस्पताल में सीएमएस प्रभारी की जिम्मेदारी अलग-अलग डॉक्टरों को दी जाती रही है, लेकिन कोई भी प्रभारी अस्पताल में दलालों की मौजूदगी या बाहर की दवाएं लिखने की प्रथा पर अंकुश लगाने में सफल नहीं हुआ।

 

डॉ. वी.वी. आर्या के सेवानिवृत्त होने के बाद नेत्र चिकित्सक डॉ. पांडेय को सीएमएस प्रभारी बनाया गया। उनके बाद यह जिम्मेदारी एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अवनीश बनौधा और फिर वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. जे.जे. राम को दी गई। लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।

 

अब उम्मीद की जा रही है कि नवागंतुक सीएमएस डॉ. आनंद उपाध्याय इन चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने और अस्पताल में व्यवस्था सुधारने में सक्षम होंगे। क्या वे डॉक्टरों के कक्ष में दलालों की उपस्थिति और मरीजों को बाहर की दवाएं लिखने की प्रथा पर लगाम लगा पाएंगे? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

 

सवाल यह है:

 

क्या मरीजों को बिना किसी बाधा के उचित और सस्ती चिकित्सा सेवा मिल पाएगी?

 

क्या जिला अस्पताल की छवि सुधर सकेगी?

अस्पताल प्रशासन और सरकार की इस दिशा में भूमिका भी

बेहद अहम होगी।

 

 

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कार्तिकेय गुबरेले(पत्रकार) जिला ब्यूरो चीफ क्राइम फोकस न्यूज 24×7 उरई (जालौन)