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गुरुग्राम–चंडीगढ़ को चुनौती देगा यूपी का मेरठ, गंगा एक्सप्रेसवे के साथ बन रहा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का नया हब

उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला आने वाले समय में देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों में शुमार होने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किया जा रहा औद्योगिक गलियारा मेरठ को गुरुग्राम और चंडीगढ़ जैसे स्थापित इंडस्ट्रियल हब्स की सीधी टक्कर में लाकर खड़ा कर रहा है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की सक्रिय रणनीति के चलते देशी ही नहीं, बल्कि अमेरिका, जापान समेत कई विदेशी कंपनियों की नजर अब मेरठ पर टिक गई है।

गंगा एक्सप्रेसवे बना गेमचेंजर

मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि यूपी के औद्योगिक भविष्य की रीढ़ बनता जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे के आसपास इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक सुविधा और बड़े भूखंडों की उपलब्धता के कारण कंपनियों को यहां निवेश के लिए अनुकूल माहौल मिल रहा है।

यूपीडा की पहल से बढ़ा निवेशकों का भरोसा

यूपीडा द्वारा जमीन अधिग्रहण, आधारभूत ढांचे के विकास और सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए निवेश प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि औद्योगिक गलियारे में मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे सेक्टरों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी वजह से विदेशी कंपनियों की रुचि लगातार बढ़ रही है।

अमेरिका और जापान की कंपनियों की एंट्री की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और जापान की कई बड़ी कंपनियां मेरठ क्षेत्र में यूनिट स्थापित करने को लेकर गंभीर हैं। इन कंपनियों के प्रतिनिधि कई बार साइट विजिट कर चुके हैं और तकनीकी व प्रशासनिक पहलुओं पर बातचीत अंतिम चरण में है। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में बड़े निवेश प्रस्तावों पर मुहर लग सकती है।

रोजगार और विकास को मिलेगी रफ्तार

औद्योगिक गलियारा विकसित होने से मेरठ और आसपास के जिलों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को न सिर्फ फैक्ट्रियों में नौकरी मिलेगी, बल्कि ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सहायक क्षेत्रों में भी विकास को गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है।

गुरुग्राम-चंडीगढ़ जैसा मॉडल

अब तक उद्योगों के लिए गुरुग्राम और चंडीगढ़ को सबसे बेहतर विकल्प माना जाता रहा है, लेकिन मेरठ तेजी से उसी मॉडल पर आगे बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर से नजदीकी, बेहतर सड़क नेटवर्क और अपेक्षाकृत कम लागत में जमीन मिलने से मेरठ निवेशकों के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।

भविष्य की तस्वीर

अगर योजनाएं समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले 5 से 10 वर्षों में मेरठ उत्तर प्रदेश वेस्ट का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बन सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहा यह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर न सिर्फ यूपी, बल्कि देश के औद्योगिक नक्शे पर मेरठ को नई पहचान दिलाने की पूरी क्षमता रखता है।

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