यूपी में जमीन खरीदना होगा आसान, नामांतरण से लेकर भू-उपयोग बदलाव तक सब होगा ऑनलाइन
■ सीएम योगी के निर्देश, फरवरी 2026 तक लागू होगा नया डिजिटल सिस्टम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन की खरीद-फरोख्त और पुश्तैनी संपत्ति से जुड़े झंझट अब इतिहास बनने वाले हैं। बार-बार तहसील के चक्कर, लेखपाल की रिपोर्ट और ढेरों कागजों की परेशानी से जल्द ही लोगों को राहत मिलने जा रही है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यूपी सरकार भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और सरल बनाने जा रही है।
🔹 एक प्लेटफॉर्म, कई काम
अब जमीन खरीदते ही नामांतरण (धारा-34) अपने-आप डिजिटल तरीके से हो जाएगा। इसके लिए अलग-अलग फॉर्म, दस्तावेज और कार्यालयों में दौड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एनआईसी द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर से स्टांप एवं पंजीकरण विभाग और राजस्व परिषद को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जा रहा है, जिसे फरवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
🔹 भू-उपयोग बदलाव भी होगा आसान
कृषि भूमि को गैर-कृषि या औद्योगिक उपयोग में बदलने के लिए धारा-80 की प्रक्रिया भी अब ऑनलाइन होगी।
आवेदन, अनुमोदन और अभिलेख अपडेट एक ही डिजिटल फॉर्म से
खसरा-खतौनी, भूमि की वर्तमान स्थिति और आसपास के क्षेत्र की जानकारी खुद-ब-खुद सिस्टम में आएगी
लेखपाल की बार-बार रिपोर्टिंग की जरूरत खत्म होगी
🔹 रजिस्ट्री होते ही नाम दर्ज
अब जैसे ही संपत्ति का रजिस्ट्रेशन होगा—
खसरा-खतौनी विवरण
मालिकाना हक का प्रमाण
नामांतरण प्रक्रिया
सब कुछ ऑटोमैटिक ऑनलाइन जांच के बाद एक साथ पूरा हो जाएगा। इससे फाइल अटकने और देरी की समस्या समाप्त होगी।
🔹 नोटिस अब व्हाट्सएप और SMS से
सरकारी नोटिस अब डाक से नहीं बल्कि ऑनलाइन पोर्टल, SMS और व्हाट्सएप के जरिए भेजे जाएंगे।
आवेदक को तुरंत जानकारी मिलेगी
प्रक्रिया पारदर्शी होगी
प्रमाणपत्र कुछ ही दिनों में ऑनलाइन डाउनलोड किए जा सकेंगे
🔹 भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल पहल से—
जमीन विवाद और फर्जीवाड़े कम होंगे
खरीद-फरोख्त में पारदर्शिता बढ़ेगी
भ्रष्टाचार और दलाली पर रोक लगेगी
🔹 ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
भू-उपयोग परिवर्तन की सरल प्रक्रिया से ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा, जिससे रोजगार के अवसर पैदा होंगे और प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
📌 कुल मिलाकर, यूपी में जमीन से जुड़े काम अब कागजों के नहीं, क्लिक के भरोसे होंगे।





