अल्हड़ युवा पीढ़ी को विकास के नाम पर पाश्चात्य शिक्षा ,अश्लील वासनापूर्ण वासना प्रेरणादायी स्वरूप का अवलोकन
रिपोर्ट :डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री “
focusnews24x7.com
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- माता पिता के अपने परिवारीय आशाओं के अनुकूल निर्माणीय वातावरण को धूमिल करने वाली स्थितियों से पड रहा है बच्चों पर प्रभाव
- पूर्व काल में भारत की संस्कृति , आदर्श, मर्यादा , नर नारियों की चारित्रीय गौरव गरिमा अति उच्च स्तर की थी
आजमाता पिता के अपने परिवारीय आशाओं के अनुकूल निर्माणीय वातावरण को धूमिल करने वाली स्थितियों भारत के नौजवान व अल्हड़ युवा पीढ़ी को विकास के नाम पर जो पाश्चात्य शिक्षा , अश्लील वासनापूर्ण वासना प्रेरणादायी स्वरूप टेलीविजन, सिनेमा व मोबाइल पर ऐसा दृश्यावलोकन दिखाए , सुनाए पढ़ाये जा रहे हैं जो बच्चों के नेत्र दृष्टि दर्शन होते हुए दिल दिमाग पर पहुंच रहे और दिल दिमाग में बैठ कर घर कर रहे हैं और उनके अन्दर अश्लील भावविचार धारा तथा शारीरीय मानसिकीय वासनामयी उत्तेजनाओं को जगाकर जो इस समय उनके इस आयुकाल मे जीवन शक्ति संचरण तथा सही शिक्षा उनके स्वयं के विषय के निर्माण करने वाली और उनके माता पिता के अपने परिवारीय आशाओं के अनुकूल निर्माणीय वातावरण को धूमिल करने वाली स्थितियों की ओर जाने वाली व बच्चों स्वयं के तथा परिवार के उच्च विकास रुपीय आशाओं के भविष्य को खा जाने वाली महज घातक सिद्ध स्वरूपीय दिखायी दे रही हैं। कुछ पोर्न साइटें चौबीस घंटे मोबाइल पर खुली रहने कारण व मोबाइल जाल मे नई पीढ़ी लड़के लड़किया सेक्स दृश्य देखने की ज्यादा आकर्षित रहते हैं पढ़ाई की ओर कम ।
पार्क बाग बगीचों में 12- 13 साल से 24-25 साल तक के लड़के लड़कियां पारस्परिक मोबाइल से बुलाने व मिलने जुलने तथा एक साथ उठने बैठने व एकान्त की आशाओं से मनोइच्छाओं से चाहों से ओतप्रोत रहने , होने की स्थिति में देखे जा सकते हैं।
पुरानी संस्कृति आदर्श मर्यादा जो भारत की सभ्यता आदर्श, मर्यादा, गौरव गरिमा , सच्चरित्रता का परिचय पूर्व काल में देखा जाता था।
बच्चे युवा पीढ़ी अपने बड़ों का सम्मान अपने भाव विचारों से करते व रखते हुये एक आदर्शीय स्वयं से स्वयं के अनुशासन में बंधे रहते हुये सही यथार्थ जो आज उनकी इस टीन एज में युवा उम्र में उनके आनंदमयी जीवन परम सत्य शिक्षामयी जीवन व भावी भविष्य के परम सत्य निर्माण से स्वयं उनकी उनके परिवार की कार्य व्यापार रोजगार शासकीय अच्छे पदों पर चयनित आर्थिक विकास पूर्ण जीवन जो उनके स्वयं के लिये अति सुखदायी हितकर विकास पूर्ण होकर सिद्ध होता था ।
वह आज गलत स्वरूपों की मानसिक स्थितियों के शिकार होने की ओर बढ़ने कारण उनके स्वयं के लिये व उनके परिवार के लिये अति घातक स्थिति में स्वरूप में संकटदायी बन रहा है । मोबाइल पर दृश्यीय सेक्स साइटें बच्चों को युवा पीढ़ी लड़के लड़कियों के जीवन को बर्बाद करने वाली उनके भविष्य को चौपट करते हुये खा जाने वाली दिखायी दे रही है प्रतीत हो रही हैं
पूर्व काल में भारत की संस्कृति , आदर्श, मर्यादा , नर नारियों की चारित्रीय गौरव गरिमा अति उच्च स्तर की थी जो भारत के मान को। विश्व में उच्च स्तर के सम्मानीय स्वरूप से देखा व माना जाता था । आज उनमें गिरावट आती दिख रही है | एक वह काल याद आता है जब वीर शिवाजी के शासन का दौर था उनके गुरु समर्थ श्री रामदास जी के सुझाव पर सूझ बूझ पर राष्ट्र में जगह -जगह व्यायामशालाएं बनवायी गयीं और परम सत्य वीरता के परिचायक हनुमान जी की मूर्तियां उसमें भारतीय सच्चरित्रीय उच्चरित्रीय स्वरूप से युवा पीढ़ी बालक बच्चे ब्रह्मचर्यीय शक्ति से सम्पन्न होने तथा पौरुषवान पुरुषार्थ बनने की ओर बढ़े और स्वस्थ भारत आदर्श भारत वीर भारत मर्यादित भारत श्रेष्ठ संस्कृतिवान पौरुषीय भारत बना व रहा। उस काल में आतताइयों आक्रान्ताओं को धूल धूसरित कर के उन्हें भारत के सच्चरित्रीय पौरुषवान बृह्मचर्यीय शक्ति से ओतप्रोत युवाओं ने, प्रौढ़ मानवों ने तथा अस्सीवर्षीय ताना जी मालसुरे जैसे वीर योद्धाओं ने उनकी जड़ों को मिट्टी में मिलाया था ।
आज के दौर में चिन्तनीय विषय है कि भारत की अल्हड़ व युवा पीढ़ी वासनामयी स्वरूपों की ग्रसितता से भोग की लालायितता की ओर बढ़ते हुये अपने जीवन, शक्ति के नाश तथा आत्मघाती स्वरूपों की ओर उन्मुख हैं । कहीं कोई अनुभवशील बड़े बूढ़े की मर्यादा आदर्श शिक्षा अनुशासन में होने रहने की कहीं कोई आवश्यकता अथवा जरूरत नहीं समझ रहे हैं I न ही उन्हे देख कर सहम रहे और न ही डर रहे | जबकि यह डरना युवा पीढ़ी के लिये बालकों के लिये सत्य और वे उच्च उन्नतियों की ओर बढ़ते , परम सत्य रुप में विकसित होते विकास करते जीवन निर्माण के अमृत तुल्य सिद्ध रहता होता और वे उच्च उन्नतियों की ओर बढ़ते परम सत्य रूप में विकसित होते विकसित करते ऐसे भारत को विश्वगुरु बनने की सम्भावनाएं आशाएं करना, रखना सम्भव नहीं दिखाई देता। बच्चों के युवाओं के इन गलत अभ्यासों पर प्रतिबन्ध लगना उनके जीवन के तथा उनके परिवार अच्छे सच्चे जीवन जीने बनाने हेतु अति आवश्यक है । इसके लिये सर्वप्रथम अश्लील सिनेमा, टेलीवीजन , मोबाइल सेक्स परोसने वाली साइटों पर कठोर से कठोर नियम नीति हेतु शासन सत्ता तथा न्यायाधीशों की ओर से कदम बढ़ाए जाएं बनाए जाएं तो यह अच्छे भारत निर्माण आदर्श भारत निर्माण एक सत्य संस्कृति कल्चर मयी भारत निर्माण कारक सिद्ध होगा।
- बहुत गा लिए प्रणय गीत, अब ये न मुझको भाते हैं ॥
- अब तो केवल क्रांति के बादल जीवन में मेरे छाते हैं।
- जग अवलोकित हो जाये कुछ ऐसा कर्तव्य कर दें ।
- एक नवीन परिवर्तन हेतु जग मन में अंगारे भर दें।
- हे मानव तुम देखो ये पीड़ा , अब मानवता लाचार है ।
- खुले नेत्र भी बन्द हैं , अब तो ये हमें नहीं स्वीकार है ।
- भूल कर सारी प्रेम साधना अब क्रांति के गीत हम गाते हैं ।
- अब तो केवल क्रांति के बादल जीवन में मेरे छाते हैं ।
- कहने को मुक्त धरा है, किन्तु गगन यहाँ लाचार है ।
- समयबंधन में बंधा हुआ अब जीवन का अधिकार है ।
- करना है मुक्त गगन को ताकि स्वच्छन्द हो सके उड़ान ।
- नष्ट हो जाये सम्पूर्ण पाशविकता विश्व में भारत को मिले गौरवमयी स्थान ।
- अब वासना के कमल भी हमको नहीं लुभाते हैं ।
- अब तो केवल क्रांति के बादल भावों में मेरे छाते हैं ॥
– डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री “





