पिरौना पंचायत में वित्तीय गड़बड़ी साबित, FIR की चेतावनी के साथ वसूली का आदेश
कोंच/जालौन। ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन लगातार कार्रवाई की मुद्रा में है। इसी कड़ी में कोंच ब्लॉक की ग्राम पंचायत पिरौना में मनरेगा और ग्राम निधि के तहत हुए विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितताएं पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। दो चरणों की जांच के बाद जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने प्रधान और दो पूर्व सचिवों से कुल 3,73,239 रुपए की वसूली के आदेश जारी किए हैं।
🔍 जांच में सामने आए मुख्य तथ्य
कई विकास कार्य अधूरे पाए गए
नाली निर्माण पूरा नहीं हुआ
अभिलेखों में आवश्यक विवरण दर्ज नहीं
जांच के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत न किए गए
अनियमितताओं की पुष्टि दो स्वतंत्र रिपोर्टों में
त्रिस्तरीय समिति ने 18 नवंबर 2024 को रिपोर्ट सौंपी थी, जबकि डिप्टी कलेक्टर/प्रशिक्षु SDM, BDO कुठौंद और लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता की संयुक्त टीम ने 8 दिसंबर 2023 को स्थलीय निरीक्षण किया था। दोनों रिपोर्टों में अनियमितताएं स्पष्ट पाई गईं।
⚖️ कारण बताओ नोटिस पर नहीं मिली संतोषजनक प्रतिक्रिया
जिलाधिकारी ने तीनों जिम्मेदारों—प्रधान सहित दोनों पूर्व सचिवों—से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन तय समय में उत्तर नहीं मिलने पर प्रशासन ने इसे आरोपों की मौन स्वीकृति माना।
💰 कितनी राशि किससे वसूली जाएगी?
उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 27(2) के तहत निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि:
प्रधान प्रीति यादव – ₹1,86,619.50
पूर्व सचिव सुमित यादव – ₹1,21,170
पूर्व सचिव अनुज गुप्ता – ₹65,449.50
➡️ कुल वसूली: ₹3,73,239
जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित राशि समय पर जमा नहीं की गई तो तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई होगी।
🚨 कदौरा ब्लॉक में भी बढ़ी हलचल, एक ग्राम पंचायत जांच के घेरे में
सूत्रों के अनुसार विकास खंड कदौरा की एक ग्राम पंचायत में भी मनरेगा और ग्राम निधि के कार्यों में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। यहां के प्रधान और सचिव पर जांच एजेंसियों की नजर है। यदि प्रारंभिक जांच में आरोप पुष्ट होते हैं, तो पिरौना की तरह यहां भी बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है।
प्रशासन की इस सक्रियता से विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ने और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की उम्मीद जताई जा रही है।






