भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग में बही भक्ति और प्रेम की धारा

■ कथा व्यास देवी माहेश्वरी श्रीजी ने दिया भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश

उरई (जालौन)। राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो उठे। कथा व्यास देवी माहेश्वरी श्रीजी ने इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी के पावन विवाह प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।

देवी माहेश्वरी श्रीजी ने कहा कि जैसे हम अपने घरों में बेटियों के विवाह का उत्सव उल्लासपूर्वक मनाते हैं, उसी भव्यता और भावनात्मक उल्लास के साथ भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी का विवाह सम्पन्न हुआ। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी जी, जो सुंदरता, भक्ति और निष्ठा की मूर्त स्वरूप थीं, ने पारिवारिक विरोध के बावजूद अपने मन, वचन और कर्म से श्रीकृष्ण को जीवनसाथी के रूप में चुना।

कथा के दौरान देवी माहेश्वरी ने रुक्मिणी जी द्वारा श्रीकृष्ण को भेजे गए प्रेम-पत्र और श्रीकृष्ण द्वारा उनका सम्मानपूर्वक हरण कर विवाह करने की लीला का अत्यंत भावपूर्ण चित्रण किया। उन्होंने इसे सच्चे प्रेम, भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण बताया।

कथा के समापन पर परीक्षित की भूमिका निभा रहे करण सिंह राजपूत और उनकी पत्नी तारा राजपूत ने आरती उतारी। तत्पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।

 

 

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कार्तिकेय गुबरेले(पत्रकार) जिला ब्यूरो चीफ क्राइम फोकस न्यूज 24×7 उरई (जालौन)