प्रभु कृपा से ही हम सभी को मिलता है सत्संग का लाभ।
सर्वप्रथम प्रवचन द्वारा चित्रकूट धाम से पातालेश्वरी दीक्षित ने बताया कि मन व तन को प्रभु कृपा से हमें सत्संग की प्राप्ति तो होती है लेकिन सत्संग में बैठकर हमारा मन कहीं ओर होता है। जिस पर ध्यान देना होगा।
जब तक सत्संग में बैठकर हम प्रभु चरणों से नहीं जुड़ेंगे तब तक हमें फल की प्राप्ति नहीं होगी।
उक्त प्रवचन श्रद्धालुओं को प्रवचनों की अमृतवर्षा करते साध्वी मिथिलेश्वरी दीक्षित चित्रकूट धाम ने कही। प्रृवचनों से पहले श्रद्धालुओं द्वारा श्री हनुमान चालीसा सुंदरकांड का पाठ करके भजनों का गायन किया गया।
साध्वी मिथिलेश्वरी दीक्षित चित्रकूट धाम ने कहा कि काम क्रोध, लोभ, मोह माया अहंकार को छोड़कर अपना जीवन सफल बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में कोई भी काम असंभव नहीं है। बस जरूरत है हमें दृढ़ निश्चय की।
मंजिल को पाने के लिए हमें सच्चाई के मार्ग पर चलना चाहिए।
मनुष्य द्वारा किए अच्छे कार्य संसार में हमारी पहचान बनाते है। अच्छे एवं दूसरों का सोचने वाले मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है उनका पूरा जीवन आनंदमयी व्यतीत होता है।
संसार में कोई भी चीज परमात्मा से छिपी नहीं है। लेकिन हम फिर भी अपने मूल उद्देश्य को भूलकर मोहमाया में फंसे हैं। जबकि मनुष्य का असली उद्देश्य परमात्मा का सिमरन करना है।





