जगद्गुरु परम पूज्य श्री निम्बार्काचार्य श्रीजी महाराज ने धर्म संसद में सनातन धर्म की रक्षा, प्रचार-प्रसार और एकता पर दिया बल ।
■चतुर्थ सनातन धर्म संसद में निम्बार्क सम्प्रदाय का प्रतिनिधित्व आनंद विभूषित जगद्गुरु परम पूज्य श्री निम्बार्काचार्य श्रीजी महाराज ने किया
■ निम्बार्क सम्प्रदाय के के संस्थापक श्री निम्बार्काचार्य जी हैं
प्रयागराज में आयोजित धर्म संसद में हम पत्रकारों को दिए गए विशेष वक्तव्य की जानकारी ली हालांकि, 27 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में सनातन धर्म संसद का आयोजन किया गया था, जिसमें कई संतों ने भाग लिया था। इस संदर्भ में, श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए थे।
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निम्बार्क सम्प्रदाय वैष्णव सम्प्रदायों में एक प्राचीन और महत्वपूर्ण शाखा है, जिसे ‘सनकादि सम्प्रदाय’, ‘हंस सम्प्रदाय’ और ‘कुमार सम्प्रदाय’ के नाम से भी जाना जाता है।
इस सम्प्रदाय के संस्थापक श्री निम्बार्काचार्य जी हैं, जिन्होंने द्वैताद्वैत (भेदाभेद) सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
इस सिद्धांत के अनुसार, जीव और ब्रह्म (ईश्वर) के बीच भेद और अभेद दोनों ही सत्य हैं।
निम्बार्क सम्प्रदाय के उपास्य देव राधा-कृष्ण की युगल छवि हैं, और इसकी प्रमुख उपासना राधा-कृष्ण की भक्ति पर केंद्रित है।
27 जनवरी 2025 को प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित चतुर्थ सनातन धर्म संसद में निम्बार्क सम्प्रदाय का प्रतिनिधित्व आनंद विभूषित जगद्गुरु परम पूज्य श्री निम्बार्काचार्य श्रीजी महाराज ने किया।
इस अवसर पर उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा, प्रचार-प्रसार और एकता पर बल दिया। उन्होंने सनातन धर्म के सिद्धांतों के प्रति समर्पण और समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
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जिसमें प्रयागराज महाकुंभ में आयोजित संतों की महा धर्म संसद का विवरण प्रस्तुत किया गया है:





