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झांसी: ग्राम पंचायत साकिन में जलसा इस्लाहे माशरा का आयोजन, नातिया कलाम और तकरीरों से गूंजा माहौल

झांसी–मोठ। मोठ तहसील की ग्राम पंचायत साकिन में जामिया अरबिया शमसुल उलूम के तत्वावधान में जलसा इस्लाहे माशरा का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग एवं उलमा-ए-किराम मौजूद रहे।
जलसे की शुरुआत मशहूर शायरे इस्लाम क़ारी ज़हीर फैज़ी के नातिया कलाम से हुई। उनकी असरदार आवाज़ और दिल को छू लेने वाले अशआर ने मौजूद लोगों के दिल जीत लिए और पूरा माहौल रूहानियत से भर गया।
कार्यक्रम के ख़ुसूसी मेहमान
आलि जनाब सैय्यद अब्दुल अली हसनी नदबी
(रिसर्च स्कॉलर, दारे अराफ़ात इंस्टीट्यूट रायबरेली एवं कोऑर्डिनेटर, ऑल इंडिया पयाम-ए-इंसानियत फ़ोरम)
ने अपनी तकरीर में कहा कि
अल्लाह के नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया कि कोई भी व्यक्ति तब तक कामिल मोमिन नहीं बन सकता, जब तक वह स्वयं नेक अमल न करे और दूसरों को भी नेक अमल की दावत न दे।
उन्होंने समाज में सुधार, भाईचारे और भलाई को अपनाने पर ज़ोर दिया और कहा कि इस्लाहे माशरा की ज़िम्मेदारी हर इंसान पर है।
इस अवसर पर कई प्रमुख उलमा-ए-किराम मौजूद रहे, जिनमें—
मौलाना मुफ्ती इमरान नदवी (झांसी)
जेरे-सरपरस्ती: मुफ्ती उसामा नदबी
(ख़ादिम मदरसा जामिया अरबिया शमसुल उलूम साकिन एवं इमाम-ख़तीब जामा मस्जिद साकिन)
हाफ़िज़ क़ारी सद्दाम (साकिन)
हाफ़िज़ आशिफ़ क़ाज़ी साहब (उस्ताद, मदरसा)
मौलाना अबूबकर (खानपुर)
मौलाना सुल्तान जामई साहब (जालौन)
मौलाना उबैश क़ासमी साहब
मौलाना जावेद क़ासमी (कोंच)
सभी विद्वानों ने समाज सुधार, नैतिकता और इंसानियत पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का समापन दुआ के साथ शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक माहौल में हुआ।
— संवाददाता: ज़हूर अहमद ख़ान, मोठ

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