टॉप 8 शहरों में 5 लाख से ज्यादा घर बिना खरीदार, सस्ते फ्लैट्स पर सबसे ज्यादा दबाव
देश का रियल एस्टेट बाजार इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी कंपनी Knight Frank India की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2025 के अंत तक देश के शीर्ष 8 शहरों में कुल 5.09 लाख घर ऐसे हैं, जिन्हें अब तक खरीदार नहीं मिले हैं।
रिपोर्ट बताती है कि खासकर 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले किफायती फ्लैट्स की बिक्री में सुस्ती साफ दिखाई दे रही है, जबकि प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट में मांग मजबूत बनी हुई है।
सस्ते घरों को बिकने में लग रहा सबसे ज्यादा समय
50 लाख रुपये से कम कीमत वाले 1,76,903 घर अब भी खाली पड़े हैं। इस सेगमेंट में सालाना आधार पर इन्वेंट्री में 7% की गिरावट आई है, लेकिन इसके बावजूद इन्हें बिकने में औसतन 8.7 तिमाहियों का समय लग रहा है।
इसके उलट 2 से 5 करोड़ रुपये के घर केवल 3.9 तिमाहियों में बिक रहे हैं, जबकि 5 से 10 करोड़ रुपये वाले घरों की बिक्री औसतन 2.9 तिमाहियों में हो रही है।
हालांकि 20 से 50 करोड़ रुपये के अल्ट्रा-लग्जरी सेगमेंट में बिक्री की रफ्तार सबसे धीमी है और इन्हें बिकने में करीब 15.8 तिमाहियों का समय लग रहा है।
किस दाम के कितने घर फंसे?
कीमत (टिकट साइज)
बिना बिके घर
सालाना बदलाव
बिकने का औसत समय
0 – 50 लाख
1,76,903
-7%
8.7 तिमाही
50 लाख – 1 करोड़
1,36,569
-3%
5.3 तिमाही
1 – 2 करोड़
1,29,761
+14%
5.5 तिमाही
2 – 5 करोड़
52,322
+40%
3.9 तिमाही
50 करोड़ से अधिक
450
+48%
9.5 तिमाही
2025 में 3.48 लाख घरों की बिक्री
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कुल 3.48 लाख आवासीय इकाइयों की बिक्री हुई। इसमें 1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले घरों का दबदबा रहा।
2025 में 1 करोड़ रुपये से महंगे 1,75,091 घर बिके, जो पिछले साल के मुकाबले 14% ज्यादा हैं। कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी 50% तक पहुंच गई है।
वहीं 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में 17% की गिरावट दर्ज की गई है। 2022 में जहां कुल बिक्री में किफायती सेगमेंट की हिस्सेदारी 37% थी, वह 2025 में घटकर 21% रह गई है।
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
Shishir Baijal के मुताबिक, बड़े शहरों में ऊंची कीमत वाले घरों की मांग मजबूत बनी हुई है, जबकि कम बजट वाले सेगमेंट में फिलहाल दबाव है। बाजार का औसत क्वार्टर-टू-सेल (QTS) 5.8 तिमाहियों पर स्थिर है, जो यह संकेत देता है कि कुल मिलाकर मांग और आपूर्ति में संतुलन बना हुआ है, लेकिन सेगमेंट के अनुसार तस्वीर अलग है।
बाजार में बदलती प्राथमिकताएं
आंकड़े साफ बताते हैं कि खरीदार अब बड़े और प्रीमियम घरों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं। मिड-सेगमेंट (50 लाख से 1 करोड़) की बिक्री भी 8% घटकर 99,422 यूनिट्स रह गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आय में असमान वृद्धि, बढ़ती निर्माण लागत और शहरी जीवनशैली में बदलाव ने रियल एस्टेट बाजार की दिशा बदल दी है। आने वाले महीनों में ब्याज दरों और सरकारी नीतियों का असर इस ट्रेंड को और स्पष्ट कर सकता है।




