उरई में एनसीसी कैडेट्स और भूतपूर्व सैनिकों का भव्य समागम, देशभक्ति और उत्साह से गूंजा कार्यक्रम
उरई। पुलिस लाइन स्थित कार्यक्रम स्थल पर आज का दिन इतिहास रच गया जब बड़ी संख्या में भूतपूर्व सैनिक अधिकारी अपने परिवारों सहित उपस्थित हुए। 58 यूपी बटालियन एनसीसी कैडेट कोर, उरई इकाई के कैडेट्स ने अपनी अनुशासनप्रिय प्रस्तुतियों और देशभक्ति से वातावरण को ऊर्जावान बना दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में जनरल अतुल भट्ट, उनकी धर्मपत्नी मिसेज भट्ट, ब्रिगेडियर पुनीत श्रीवास्तव (विशिष्ट सेवा मेडल, ग्रुप कमांडर, लखनऊ), ग्रुप कमांडर विवेक कौशल निहाला (ग्वालियर) तथा मिस्टर झाला एवं उनकी पत्नी का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।

अपने संबोधन में ब्रिगेडियर पुनीत श्रीवास्तव ने कहा कि आज का यह अद्भुत समागम हमारे लिए अविस्मरणीय है। एनसीसी कैडेट्स के अंदर जो अनुशासन, समर्पण और देश सेवा का जज्बा दिखाई दे रहा है, वह भारत को नई दिशा देगा। उन्होंने बताया कि आने वाले तीन वर्षों में एनसीसी की क्षमता को दुगुना किया जा रहा है, जिसके लिए 25 जेसीओ और 55 एनसीओ की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। इसमें भूतपूर्व सैनिकों का विशेष योगदान लिया जाएगा।

जनरल अतुल भट्ट ने भी कहा कि एनसीसी कैडेट्स ही देश का भविष्य हैं और आज उनकी प्रस्तुतियों ने नए भारत की झलक दिखाई है। बच्चों ने स्मार्टली ड्रिल मूवमेंट कर, परेड और सलामी से दर्शाया कि वे अनुशासित और प्रशिक्षित नागरिक बन रहे हैं।

कार्यक्रम में “ऑपरेशन सिंदूर” का भी उल्लेख किया गया, जिसमें भारतीय महिलाओं ने वैश्विक स्तर पर देश की ताकत और महिला सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया। साथ ही, पहलगाम हमले और पाकिस्तान की नापाक हरकतों पर देश की करारी प्रतिक्रिया पर भी चर्चा हुई।

बच्चों ने मंच पर देशभक्ति से ओतप्रोत नाट्य मंचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के वीरतापूर्ण संघर्ष का सजीव चित्रण तथा देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति ने सभी की आंखें नम कर दीं। विशेषकर “ऐ मेरे वतन के लोगों…” गीत ने पूरे पंडाल को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया। कई भूतपूर्व सैनिक भी गीत सुनकर भावुक हो उठे।

कार्यक्रम में कर्नल साहब ने सैनिकों और उनके परिवारों के बीच विरह पर आधारित एक भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जिसने सभी के हृदय को छू लिया।

इस अवसर पर शहीदों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया। श्रीमती कांति देवी (शहीद हवलदार धर्मपाल सिंह), श्रीमती भूरी देवी (शहीद नायक योगेश सिंह), तथा श्रीमती मेनका सिंह (शहीद शैलेंद्र सिंह, 17 सितंबर 2013) सहित अन्य शहीद परिवारों को सम्मानित कर उपहार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का समापन देशभक्ति के नारों और कैडेट्स के जोशीले उत्साह के साथ हुआ। यह समागम अपने आप में प्रेरणादायी रहा, जिसने सभी को देश सेवा के लिए नया उत्साह और संकल्प प्रदान किया।






