मेरी प्रिय साहसी बेटी नेहा सिंह राठौर तुम्हारे आत्मायी सत्य, यथार्थ हृदयी सत्य और संसार समाज के सर्व वर्णीय मानव सर्वहितीय सत्य एवं राष्ट्र के अभावग्रस्त, दुर्बल, निर्बल , गरीब, बेरोजगार,पढ़ने वाले बच्चे बालक बालिकायें व अन्य समाजीय जन मानसीय विषम समस्याओं के ऊपर सत्तारूढ़ नेतृत्व , शासकीय अधिकारी, कर्मचारी जिनका सम्पूर्ण दायित्व राष्ट्र में घटने वाली आतंकवादी घटनायें व राष्ट्र के जनमानस की अन्य तमाम जीवन की आपूर्ति परक तमाम समस्याओं की विषम परिस्थितियों की गतिविधियों के प्रति सत्तारुढ़ शासन , सत्तारूढ़ सरकार व शासकीय अधिकारी व कर्मचारी राष्ट्र में होने वाली सही व गलत स्थितियों समाजीय लोगों के साथ उपरोक्त शासन सत्ता की सही स्थितियां लाने की बनाने की व्यवस्था की सत्ता रुढ़ सरकार व शासन व्यवस्था सम्हालने वाले स्वराष्ट्र के जनमानस सभी हर स्थिति की सुत्यवस्था बनाने व देने के जिम्मेवार हैं सभी का सुव्यवस्था बनाने में व रखने में कर्तव्य व दायित्व है। देश में कमी कमजोरियों की स्थितियों पर प्रत्येक जागरुक नागरिक का कवि का, साहित्यकार का व स्वतंत्र पत्रकार का विषम स्थितियों का आइना सरकार, शासन को दिखाना, बताना, बोलना सम्पूर्ण संवैधानिक अधिकार है कुछ धूर्त पाखण्डी बदमाश बेइमान झूठफरेब में लिप्त निज सुख स्वार्थ की सिद्धता हेतु लोभ लालच के वशीभूत वाक् पटुता के धनी, बाहर से मीठे अन्दर विषैले असामाजकीय चाटुकार, चापलूस अनैतिकता की नियत से ओत प्रोत वर्णगत दम्भीय अहंकार से ग्रसित वर्तमान की सत्तारूढ़ नेतृत्व व शासकीय व्यवस्था की चाटुकारिता में अपने लोभ लालच के वशीभूत होकर शासकीय हथियार की भूमिका निभाते हुए राष्ट्र में विद्यमान विषम परिस्थितियों में शासकीय कमजोरियों की सहजोरियों के रूप में समाज की सत्य बोलने बालों के सत्य को असत्य बताकर और असत्य को सत्य बताकर वीडियो के माध्यम से व्यक्त करेंगे व थाना , कोतवाली में केस दर्ज करायेंगे । सत्यवादियों की आवाज दबाने की नियत से सत्य की व्यक्तता बन्द करने हर तरह से दबाव डालेंगे डलवायेंगे । तथा ऐन केन प्रकारेण साम , दण्ड,भेद का प्रयोग चलायेंगे और निडर सत्य का मुँह बन्द नहीं हुआ तो जान से भी मरवायेंगे इन कुटिल कपटियों कालेमन काले धंधेवाले अन्यायी ,अत्याचारी सत्य को झुटलायेंगे व असत्य को बढ़ायेंगे। हे निशच्छल , निष्कपट , सत्यभाषी, निडर,साहसी इन धूर्तों ,पाखण्डियों, अन्याय अत्याचारियों से सत्य व्यक्त करने में कभी मत डरना। आत्म साहस से सत्य को सत्य रूप में ही व्यक्त करना और जो कमी कमजोरियां शासकीय व्यवस्था की सत्तारूढ़ व्यवस्था की हैं उन्हे पूर्ण बेबाक हो कर व्यक्त करना । मैं तुझ जैसी वीर बेटी पर गर्व करता हूँ जो बेबाक बात सत्य की प्रकट का साहस रखती है। मेरा आशीर्वाद है। तुझ जैसी बेटियों के लिए – तुम हो श्री शारदे मां की सत् पुत्री कभी न हिम्मत हारना, किन्ही भी कठिन परिस्थितियों में सत्य की व्यक्तता से कभी कन्नी न काटना । सत्य की बलिवेदी पर जीवन को वारना , तुम हो माँ सरस्वती की सत् पुत्री कभी हिम्मत न हारना। वीर भगतसिंह ने सत्य को विस्थापित करने के लिए सर कटवाया था। गुरु गोविन्द सिंह के वीर चार पुत्रों ने असत्यीय अत्याचार के आगे कभी भी न शीष नवाया था । वीरों की गाथा अमर है। जब तक तन में प्राण रहे, जबतक जीवन में सांस रहे असत्य के आगे कभी सर न झुकाना अमर होकर आये नहीं, सत्य (ईश्वर) पर प्राणों की आहुति भेंट चढ़ा जाना, फिर भी कभी न घबराना ।

-डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

 

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