पंडित शास्त्री संस्कृत के प्रकांड विद्वान और माँ पीतांबरा पीठ के आचार्य पंडित ओम नारायण शास्त्री हुये पंच तत्व में विलीन।
■ पीतांबरा पीठ में श्रद्धालुओं और विद्वानों ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
■ मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शोक संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा माँ पीतांबरा पीठ के आचार्य के रूप में उनकी सेवाएँ अमूल्य थीं। उनके निधन से समूचे क्षेत्र में शोक की लहर है।
■ उनके निधन पर मध्य प्रदेश के र्पूव मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक व्यक्त किया है
■पंडित शास्त्री का निधन समस्त सनातनियों के लिए अपूरणीय क्षति है।
■ पीतांबरा पीठ के आचार्य पंडित ओम नारायण शास्त्री के पुत्र याज्ञवल्क्य दिवेदी भी वर्तमान में पीतांबरा पीठ दतिया के आचार्य हैं तथा अपने पूज्य पिताजी के पद चिन्हो पर चलते हुए मां पीतांबरा माई व राष्ट्र गुरु श्री स्वामी जी महाराज के लिये सेवारत रहेंगे।
■ शास्त्री याज्ञवल्क्य दिवेदी ने कहा, “पिताश्री ने जीवनभर माँ पीतांबरा की सेवा की मैं भी पीठ की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करता रहूँगा।”
■ राष्ट्रगुरु श्री स्वामी जी महाराज के चरण सेवक व उनके परम शिष्य थे।आचार्य पंडित ओम नारायण शास्त्री पीठ के स्तंभ थे। 
दतिया, मध्य प्रदेश— माँ पीतांबरा पीठ के मुख्य आचार्य, पंडित ओम नारायण शास्त्री का 98 वर्ष की आयु में गुरुवार शाम निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और ग्वालियर के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
पंडित शास्त्री संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और माँ पीतांबरा पीठ के आचार्य के रूप में उनकी सेवाएँ अमूल्य थीं। उनके निधन से समूचे क्षेत्र में शोक की लहर है।
उनके निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शोक व्यक्त किया है। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि पंडित शास्त्री का निधन समस्त सनातनियों के लिए अपूरणीय क्षति है।
पंडित ओम नारायण शास्त्री के निधन से धार्मिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हुआ है, जिसे भर पाना कठिन होगा।
पीतांबरा पीठ के आचार्य पंडित ओम नारायण शास्त्री के निधन के बाद उनके पुत्र याज्ञवल्क्य दिवेदी भी माई की सेवाये र्पूण निष्ठा के साथ कर रहे है।
माँ पीतांबरा पीठ के मुख्य आचार्य, संस्कृत और वेदों के महान ज्ञानी पंडित ओम नारायण शास्त्री का 98 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वही उनके पुत्र याज्ञवल्क्य द्विवेदी ने मुखाग्नि दी उनके निधन से धार्मिक और शैक्षणिक जगत में गहरा शोक व्याप्त है। पीतांबरा पीठ में श्रद्धालुओं और विद्वानों ने उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
हालांकि, पीठ की परंपरा और माँ पीतांबरा की सेवाओं मे उनके जयेष्ठ पुत्र याज्ञवल्क्य दिवेदी भी शुरु से ही सक्रिय रहे है।
पंडित याज्ञवल्क्य द्विवेदी शास्त्री वर्तमान में पीतांबरा पीठ दतिया के आचार्य हैं तथा अपने पूज्य पिताजी के पद चिन्हो पर चलते हुए मां पीतांबरा माई व राष्ट्र गुरु श्री स्वामी जी महाराज के लिये सेवारत रहेंगे
पूरे देश से संत-महात्माओं, राजनेताओं और श्रद्धालुओं ने पंडित शास्त्री के निधन पर शोक व्यक्त किया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनके योगदान को अविस्मरणीय बताते हुए संवेदना व्यक्त की।
याज्ञवल्क्य दिवेदी ने कहा, “पिताश्री ने जीवनभर माँ पीतांबरा की सेवा की मैं भी पीठ मे माई की सेवा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जीवंत पर्यंत करता रहूँगा।”
दतिया और आसपास के क्षेत्र में इस परिवर्तन को श्रद्धालु सकारात्मक रूप में देख रहे हैं और उन्हें उम्मीद है कि याज्ञवल्क्य दिवेदी भी पीतांबरा पीठ की आध्यात्मिक धारा पहले की तरह प्रवाहित करते रहेगे।
पंडित ओम नारायण शास्त्री के निधन पर धार्मिक जगत में गहरा शोक व्याप्त है। दतिया के पीतांबरा पीठ के इस महान आचार्य के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कई संत-महात्माओं और धार्मिक नेताओं ने अपनी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं।
■ स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा, “पंडित ओम नारायण शास्त्री जी का निधन हमारे लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी विद्वता और समर्पण सदैव स्मरणीय रहेंगे।”
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, “शास्त्री जी ने अपने जीवन को धर्म और समाज सेवा के लिए समर्पित किया। उनका योगदान अनमोल है।”
दतिया के स्थानीय संत समाज ने भी शोक सभा आयोजित कर पंडित शास्त्री को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट रुप से कह सकते है कि पंडित ओम नारायण शास्त्री का निधन धार्मिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसे भर पाना कठिन होगा।
ॐ अंतिम संस्कार के समय एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला जब मुखाग्नि के समय एक गौ माता भी वहां उपस्थित रही, मानो दिवंगत आत्मा को अंतिम विदाई देने आई हो।ॐ 
दतिया स्थित माँ पीतांबरा पीठ के आचार्य, पंडित श्री ओम नारायण शास्त्री जी का हाल ही में देवलोकगमन हो गया, जिससे आध्यात्मिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। पंडित शास्त्री जी संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन पीतांबरा पीठ के लिए समर्पित कर दिया था।
उनके अंतिम संस्कार के समय एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब मुखाग्नि के समय एक गौ माता भी वहां उपस्थित रही, मानो दिवंगत आत्मा को अंतिम विदाई देने आई हो। यह दृश्य वहां उपस्थित भक्तों के लिए आश्चर्यजनक और भावुक करने वाला था, जो पंडित शास्त्री जी की दिव्यता और गौ माता के प्रति उनके स्नेह को दर्शाता है।
पंडित ओम नारायण शास्त्री जी के निधन पर अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने शोक व्यक्त किया है। केंद्रीय मंत्री भानु प्रताप सिंह वर्मा ने कहा, “पीतांबरा पीठ दतिया के आचार्य, श्रद्धेय पंडित श्री ओम नारायण शास्त्री जी के देवलोक गमन का समाचार अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है। ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।” मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, “माँ पीतांबरा दिवंगत पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें।”
पंडित शास्त्री जी के निधन से भारत के आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उनका जीवन और शिक्षाएं सदैव अनुकरणीय रहेंगी, और उनकी स्मृति भक्तों के हृदय में अमर रहेगी।








