आज की हमारी खास पेशकश श्रीनाथ जी मंदिर में अन्नकूट की लूट भक्ति, परंपरा और प्रेम का पर्व
राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथ जी मंदिर में आज कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के पावन अवसर पर अन्नकूट महोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है।
भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है, और हर कोई इस अद्भुत दृश्य — “अन्नकूट की लूट” — को देखने के लिए उत्सुक है।
कार्तिक मास की यह तिथि वैष्णव परंपरा में अत्यंत विशेष मानी जाती है।
मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अभिमान को तोड़ते हुए गोवर्धन पर्वत उठाया था — और तभी से अन्नकूट महोत्सव का प्रारंभ हुआ।
नाथद्वारा के श्रीनाथ जी मंदिर में यह उत्सव भव्य तरीके से मनाया जाता है।
सुबह से ही मंदिर में साज-सज्जा, पुष्पों की वर्षा और भोग-प्रसादी की तैयारियों का दौर चलता है।
मंदिर में आज हजारों प्रकार के व्यंजन भगवान श्रीनाथ जी को अर्पित किए जाते हैं।
कहा जाता है कि यह ‘56 भोग’ से भी बढ़कर, ‘अन्नकूट’ के रूप में अर्पित किया जाता है — जिसमें मिठाइयों, अनाजों, फलों और विविध प्रसादों का अंबार लगा होता है।
और फिर आता है भक्तों का सबसे प्रिय क्षण — “अन्नकूट की लूट”।
जैसे ही श्रीनाथ जी के चरणों से प्रसाद वितरण शुरू होता है, श्रद्धालु भक्ति उमंग में डूबकर अन्नकूट का प्रसाद पाने के लिए आगे बढ़ते हैं।
यह दृश्य केवल परंपरा नहीं, बल्कि भक्ति, आनंद और एकता का प्रतीक है।
हर साल हम यहाँ आते हैं, श्रीनाथ जी का प्रसाद पाना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।” “यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है, इसे अन्नकूट की लूट इसलिए कहा जाता है क्योंकि भक्त प्रेम से भगवान के भोग में सहभागी बनते हैं।






