वसुधैव कुटुम्बकम् , आत्मकुटुम्बकम् का उद्घोषी ही सत्य नेतृत्व करने का सत्य उत्तराधिकारी
■ऐसे ही व्यक्ति व्यक्तित्व धारी को सत्य नेता बनना चाहिए
रिपोर्ट: डा० बनवारीलाल पीपर “शास्त्री
जो विश्व ,जीव , प्राणी , मानव के सम्पूर्ण हित कल्याण के दृष्टि दर्शन को पूर्ण सत्य स्वरूप से अपने हृदय , मन मस्तिष्क में धारण किये हो ।
परमपिता परमात्मा के सत्य नियमों व न्याय में पूर्ण विश्वास करने व रखने वाला हो। सभी के प्रति आत्मवत् मनोभावी, सभी भौतिक ऐश्वर्यगामी इच्छा आकांक्षाओं से रहित, पूर्ण परमसत्य आत्मत्यागी ।
सम्पूर्ण भेदभावों से रहित ।
सभी व्यक्तिगत एवं पारिवारिक लोभ लाभ की लालसाओं से मुक्त , संसार समाज के लोगों की अति आवश्यकीय सामने खड़ी परिस्थितियों के निराकरण का तथा अति आवश्यकीय व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित स्वरूप प्रदान करने कराने हेतु संघर्ष करनेवाला ।
पूर्ण निष्कामी , पूर्ण निःस्वार्थी, पूर्ण निष्कपट , पूर्णतया आरोग्यवान , छल पाखण्ड धूर्तता से पूर्णतया दूर | आत्मीयता व मानवता के भावों से भरा हुआ । विश्व प्राणियों मानवों के सत्य मंगल आनंद ख़ुशी की विस्थापना हेतु पूर्णतया तत्पर ।
वसुधैव कुटुम्बकम् , आत्मकुटुम्बकम् का उद्घोषी ही सत्य नेतृत्व करने का सत्य उत्तराधिकारी है । अर्थात् ऐसा ही व्यक्ति व्यक्तित्व धारी को सत्य नेता बनना चाहिए तथा संसार व समाज के लोगों को बनाना चाहिए यही सत्य नेता की व्याख्या है ।
– डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री “





