कालपी कोतवाल समेत दो पुलिस अफसर लाइन से बाहर, दो साल पुराने जमीन घोटाले में गिरी गाज
जालौन।


जिले के चर्चित जमीनी फर्जीवाड़े प्रकरण में आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। शासन के आदेश पर कालपी कोतवाल परमहंस तिवारी और कालपी में उस वक्त अतिरिक्त प्रभारी रहे तथा वर्तमान में झांसी में तैनात निरीक्षक मुहम्मद अशरफ को निलंबित कर दिया गया। कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई है।
पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार ने जानकारी दी कि जांच में गंभीर लापरवाही उजागर होने पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्यवाही की गई। मामला वर्ष 2023 का है, जब कालपी तहसील के छौंक गांव की जमीन पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की गई थी। जमीन असल मालिक विद्यावती पुत्री मुनीश्वर पत्नी रघुवीर सिंह यादव के नाम दर्ज थी, लेकिन आरोपियों ने षड्यंत्रपूर्वक विद्यावती के नाम पर फर्जी आधार कार्ड बनवाया। इसके बाद छिद्दन पत्नी रघुवीर सिंह यादव निवासी धमना को असली मालकिन के रूप में पेश कर लगभग 2 करोड़ 17 लाख रुपये में बैनामा करा दिया गया।
इस मामले की विवेचना में उस समय की पुलिस टीम पर कई गंभीर चूकें सामने आईं। न तो दस्तावेजों की सही ढंग से जांच की गई और न ही आरोपियों की गहराई से पड़ताल की गई। यही वजह रही कि जिम्मेदारी तय होने के बाद वर्तमान कोतवाल और तत्कालीन अतिरिक्त प्रभारी दोनों को निलंबन झेलना पड़ा।
अब तक पुलिस इस मामले में 26 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। कार्रवाई के दौरान करीब 17 लाख 80 हजार रुपये नकद और डेढ़ लाख रुपये कीमत की सोने की चेन बरामद की गई थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में संदीप, नमन, महेंद्र सिंह, शैलेंद्र सिंह, मनीष, जगमोहन, जितेंद्र, सचिन, आशीष सिंह, अनमोल, आशुतोष और प्रशांत समेत कई नाम शामिल हैं।
इसी कड़ी में उरई के धर्मेंद्र सक्सेना का नाम भी सामने आया था। हाल ही में उसे कोलकाता से दबोचा गया। जांच में खुलासा हुआ कि वह अंडमान-निकोबार की आईडी के जरिये करीब 38 हजार फर्जी आधार कार्ड बनाने के बड़े रैकेट में शामिल था।





