जब सत्यवादी को सत्य आचारीय, निश्छल, निर्मल , निष्कपट अभेदीय, मानवता के पुजारियों को बर्दाश्त नहीं किया गया ।
■ और कुटिल-कपटी, साम , दाम, दण्ड ,भेद की मानसिकता रखने वाले राजनीतिज्ञ ऐन केन प्रकारेण संरचना करके अपना के बड़ी बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंचे ये धूर्त
रिपोर्ट : डा० बनवारीलाल पीपर “शास्त्री
जब इन धूर्त, पाखण्डीय, अन्यायीय, अत्याचारीय,छलीय छद्मीय, झूठ से ओत प्रोत,धोखेबाजों,दगाबाजों, असत्य वादियों ने कुटिल-कपटी, साम , दाम, दण्ड ,भेद की मानसिकता रखने वाले राजनीतिज्ञ अथवा सामाजिक स्वरूपों में एन केन प्रकारेण संरचना करके अपना के बड़ी बड़ी ऊंचाइयों पर पहुंचे
और अंधों की अंधी चाल की शिकार अंधविश्वासियों की भीड़ ने तम ( अंधकार ) गुण को अपनाकर
बिरले इक्का दुक्का करोड़ों, अरबों में एक आद सत्यवादी को सत्य आचारीय, निश्छल, निर्मल , निष्कपट अभेदीय, मानवता के पुजारी को बर्दाश्त नहीं किया और ना ही कभी स्वीकारा
उदाहरणार्थ : बुद्ध को खाने कुछ ऐसा दे दिया जिससे उनकी मृत्यु हो गयी
• ईसा के हाथों में और छाती में कीलें ठोक दी गयीं । जिस से ईसा की मृत्यु हुई ।
• भगवान महावीर के कानों में कीला ठोक दिया गया ।
सुकरात को विष दे दिया गया ।
महा ऋषि दयानन्द सरस्वती को खाने में जहर दे दिया गया ।
भगतसिंह को फांसी पर चढ़ा दिया।
महान सत्य विचारक, अन्याय अत्याचार का विरोध करने वाले चंद्र शेखर आजाद को घेर लेने कारण स्वयं अपना जीवन समाप्त करना पड़ा
अब्राहिम लिंकन की हत्या कर दी गयी ।
सम्बूक ऋषि का वध कर दिया गया।
■ नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, लाल बहादुर “शास्त्री”, बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर वर्तमान में सत्य वक्ता राजीव दीक्षित इनकी मोतें आजतक संदिग्ध हैं
ऐसे असंख्य उदाहरण हैं जो इतिहास में वर्णित हैं। अथवा इतिहास साक्षी है इन अन्यायियों ने इन अत्याचारियों ने उन्हे जीने नहीं दिया ।
सदैव मौत के घाट उतारते रहे । यह कैसी विडम्बना है l जिसे सत्य , सुख शान्ति , पूर्ण परम सत्य आनन्द सर्व सुखी, संसारीय स्वरूपीय , त्यागीय , तपस्वीय, सत्यवादीय, निर्मल, निष्कपट, निश्छल, निष्पाप, निष्कलंकीय महामानवो , अवतारियों, पीर पैगम्बरों के सत्य अस्तित्व को मिटाते ही रहे ।





