Spread the love

अपने ही जब कर्तव्य भूल जाएं तो गैरों से शिकायत कैसी—डा. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’ ने गीत के माध्यम से कही जीवन की गहरी बात

रिपोर्ट — विशेष संवाददाता

झांसी। जीवन में रिश्तों, अपनत्व और अपेक्षाओं को लेकर डा. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’ ने अपने विचारों और गीत के माध्यम से एक गंभीर एवं चिंतनशील संदेश प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि जब सबसे नजदीकी रिश्तों में भी सत्य, कर्तव्य, दायित्व और स्नेह का अभाव दिखाई देने लगे, तब व्यक्ति को दूसरों से अपेक्षाएं रखने के बजाय स्वयं को पहचानने और अपने जीवन को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

डा. शास्त्री के अनुसार, परिवार और रिश्ते जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं,

लेकिन रिश्तों की वास्तविक मजबूती केवल नाम या संबंध से नहीं, बल्कि कर्तव्य, जिम्मेदारी, ईमानदारी और स्नेहपूर्ण व्यवहार से होती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब अपने ही लोग अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करते, तो पड़ोसी, मित्र, रिश्तेदार अथवा समाज के अन्य लोगों से अत्यधिक अपेक्षा रखना भी उचित नहीं है।

उन्होंने अपने विचारों में आत्मप्रेम और आत्मनिर्भरता को जीवन के सुख, शांति और आनंद का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनका कहना है कि व्यक्ति को अपने जीवन के कार्यों को स्वयं पूरा करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए और अनावश्यक आश्रय तथा अपेक्षाओं से स्वयं को मुक्त रखना चाहिए।

डा. शास्त्री ने वैवाहिक जीवन के संदर्भ में भी कहा कि यदि पत्नी जीवित रहते हुए सत्य कर्तव्य, दायित्व और स्नेहपूर्ण भाव से जीवनसाथी का साथ निभाती है, तो वह साथी और सहयोगिनी के रूप में पर्याप्त है। ऐसे में व्यक्ति को दूसरों पर निर्भर रहने की अपेक्षा अपने जीवनसाथी और स्वयं के साथ संतुलित जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।

गीत में दिखाया समाज का आईना

इन्हीं भावनाओं को उन्होंने अपने गीत “यारो यारो यारो, यह जो दुनिया है…” के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। गीत में बदलते सामाजिक संबंधों, स्वार्थ, छल-कपट और अवसरवादिता पर व्यंग्य किया गया है।

गीत की पंक्तियां—

“यह जो दुनिया है, मैंने इसे देखा है,
मैंने इसे समझा है,
सब धोखा ही धोखा है…”

समाज में व्यक्ति के अनुभवों और रिश्तों की बदलती प्रकृति पर विचार करने के लिए प्रेरित करती हैं।

गीत में यह भी कहा गया है कि दुनिया में अनेक लोग अपने स्वार्थ के अनुसार संबंध निभाते हैं। कोई मीठी बातों से अपना मतलब निकालता है तो कोई शक्ति और प्रभाव के आधार पर सम्मान प्राप्त करता है। गीतकार ने समाज में कमजोर व्यक्ति के साथ होने वाले व्यवहार और प्रभावशाली व्यक्ति के प्रति बदलते रवैये को भी व्यंग्यात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया है।

अपेक्षाओं से मुक्त होकर स्वयं को पहचानने का संदेश

डा. शास्त्री का मूल संदेश यही है कि मनुष्य को सबसे पहले स्वयं को पहचानना चाहिए। दूसरों से मिलने वाले प्रेम, सहयोग और सम्मान की अपेक्षा रखने के बजाय अपने भीतर आत्मबल पैदा करना चाहिए।

उनके विचारों का सार है—

“अपने जो दें धोखा, तो गैरों से शिकायत क्या।
अपने जब अपना कर्तव्य-दायित्व भूल गये,
फिर दूसरों से आशा और अपेक्षा क्या।”

उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि जीवन में अनावश्यक अपेक्षाओं के कारण दुखी होने के बजाय स्वयं को अपना सच्चा साथी बनाएं। आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जीने से व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी मानसिक शांति बनाए रख सकता है।

अंत में डा. बनवारी लाल पीपर ‘शास्त्री’ का संदेश है कि अपने को पहचानो, स्वयं को अपना मानो और जीवन को आत्मबल के साथ जियो—यही सुख, शांति और आनंद की दिशा में एक मजबूत कदम हो सकता है।

यारो यारो यारो

यह जो दुनिया है मैंने इसे देखा है

मैंने इसे समझा है

सब धोखा ही धोखा है

जियो राम यारो यह जो दुनिया है

मैंने इसे देखा है

मैंने इसे समझा है

सब धोखा ही धोखा है

जियो राम यहाँ मतलब के सब बन्दे है

यहाँ चोरी के सब धंधे है

कोई फीता काटे हाथों से

कोई लूटे मीठी बातों से

बस फ़र्क है, इतना चोरो में

कोई बड़ा कोई छोटा है

जियो राम यारो यह जो दुनिया है

मैंने इसे देखा है

मैंने इसे समझा है

सब धोखा ही धोखा है

जियो राम झुकते को सभी झुकाते है

गिरते को सभी गिराते है

जो नहले पर दहला मारे

उसको आदाब बजाते है

कुछ झूठ कहा हो भैया

तो सर मेरा तेरा जूता है

जियो राम यारो

यह जो दुनिया है मैंने इसे देखा है

मैंने इसे समझा है

सब धोखा ही धोखा है

जियो राम यारो

यह जो दुनिया है

मैंने इसे देखा है

मैंने इसे समझा है , मैने इसे जाना है

सब धोखा ही धोखा है

जियो राम जियो राम जियो राम ॥

“अपने जो दें धोखा , तो गैरों से शिकायत क्या ।

अपने जब अपना कर्तव्य दायित्व भूल गये ,   फिर दूसरों से आशा और अपेक्षा क्या ।

अपने ही को पहिचानों और अपने स्वयं को ही अपना जानो ।

बस इस तरह जीवन बना लो , इससे अच्छा क्या ॥

– डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री “

Share.