Author: Banwari Lal Shastri

आज दहेज के लालच में सामाजिक लोगों की मनो सोचीय खोखली मान्यताएं (क्योंकि आचार चरित्र कुछ और ,और वाह्य भाव विचारीय प्रदर्शनीय नाटक मीठे बोलने मधुरता…

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सृजनसत्ता ने जो कर्ता, धर्ता , भर्ता , जीवन चेतना समापन कर्ता है। उसने सबके साथ पूर्ण परम सत्य ( जीव जन्तु, प्राणी ,पशुपक्षी ), मानव…

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हे मेरे प्यारे आत्मिक भाइयों, माताओं, बहिनों , बेटियों ,  गृहलक्ष्मियों पाप आचार अपनाकर , कुकर्मों की फांश में बांधकर एक दूसरे को अपने ही आत्मिक…

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बिन काज आज महाराज लाज गई मेरी। दु :ख हरौ द्वारिका नाथ शरण मैं तेरी ॥ दु:शासन वंश कठोर महा दुःख दायी। कर पकड़त चीर लाज…

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वाह रे राष्ट्र के मंत्री पद ? जिनकी संताने अहंकार वशीभूत होकर निरपराध निर्दोषों पर गाड़ियां चढ़ाकर प्राण ले लेते हैं। जबकि वे लोग अपने दृष्टिकोण…

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वैवाहिक स्वरूप का पूर्ण परम सत्य, सुख, शान्ति , आनंद यदि लेना चाहते हो तो ? सत्य भार्या, सहधर्मिणी, सहसंगिनी  का स्वरूप सत्य आचारीय सम्पूर्ण पूर्ण…

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व्यक्ति का जन्म लेने या जीवन जीने का सत्य अभिप्राय है अथवा सत्य तात्पर्य है अच्छे और सत्य कर्म करना चाहिए और ज्यादातर सम्पूर्णतया शान्त रहना…

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भारत में शासकीय प्रत्येक विभाग की निर्धारित आचार संहितायें, फिर भी विभागीय कर्मचारियों और सत्तारूढ़ लोगों पर पक्षपातीय आरोप, कार्य व्यवस्था पर, ऐसा क्यों ? रिपोँट…

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