जालौन में किसानों की बढ़ी परेशानी: बारिश से धान की फसल प्रभावित, व्यापारियों पर 400 रुपये प्रति क्विंटल कम खरीदने का आरोप
■ धान बेचने के लिए भटक रहे किसान, भुगतान में कटौती और देरी से बढ़ी मुश्किलें; बाजरा खरीद केंद्र पर भी सरकारी खरीद नहीं होने की शिकायत
जालौन, उत्तर प्रदेश।
जनपद जालौन में इन दिनों किसान कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक ओर खेतों में तैयार धान की फसल को बारिश से बचाने की चिंता सता रही है, वहीं दूसरी ओर उपज बेचने के लिए भी किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि व्यापारी सरकारी समर्थन मूल्य के मुकाबले करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर धान खरीद रहे हैं। इतना ही नहीं, भुगतान में भी 2 प्रतिशत तक की कटौती किए जाने की बात सामने आ रही है।
किसानों का कहना है कि बारिश ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। खुले स्थानों पर रखी धान की उपज भीगने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में किसान जल्द से जल्द अपनी फसल बेचना चाहते हैं, लेकिन उन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
वहीं किसानों की एक अन्य बड़ी समस्या खाद की उपलब्धता को लेकर है। किसानों के अनुसार खाद की सोसायटियां बंद पड़ी हैं, जिससे आगामी फसलों की तैयारी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा मूंग की फसल का भुगतान भी अभी तक पूरी तरह नहीं हो पाया है, जिससे किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बाजरा खरीद केंद्र को लेकर भी किसानों में नाराजगी है। उनका कहना है कि खरीद केंद्र पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होने से किसान अपनी उपज बेचने के लिए परेशान हैं। सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ नहीं मिलने के कारण किसानों को निजी व्यापारियों के भरोसे रहना पड़ रहा है।
किसानों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वे अपनी समस्याएं लेकर जाएं तो कहां जाएं? एक तरफ मौसम की मार, दूसरी तरफ फसल का उचित मूल्य नहीं मिलना, खाद की किल्लत और पुराने भुगतान का इंतजार। किसानों का कहना है कि उनकी समस्याओं को लेकर न तो जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है और न ही संबंधित अधिकारियों से उन्हें राहत मिल पा रही है।
अब किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि धान की सरकारी खरीद व्यवस्था सुचारू कराई जाए, खरीद केंद्रों पर बाजरे की खरीद शुरू हो, खाद की सोसायटियां खुलवाई जाएं और मूंग का बकाया भुगतान जल्द कराया जाए। साथ ही किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
रिपोर्ट: महेश चौधरी, जालौन
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