वाह रे राष्ट्र के मंत्री पद ? जिनकी संताने अहंकार वशीभूत होकर निरपराध निर्दोषों पर गाड़ियां चढ़ाकर प्राण ले लेते हैं। जबकि वे लोग अपने दृष्टिकोण से अन्याय परक व्यवस्था नियम कानून हटाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। हे परमपिता परमईश्वर ऐसे मंत्री पद की एवं ऐसा कोई भी राष्ट्रीय सत्ता में जो देश के जनमानस की किसी भी सेवा से जुड़ा हो और उसमें हम अहंकार युक्त भृष्ट्र आचरणीय , भृष्ट्र आचारीय व अन्याय अत्याचार युक्त कोई कर्म करने की सोचें व बनायें  उस इच्छा आकांक्षा उत्पन्न होने से पहिले ही मेरे प्राणों का हरण कर लेना । क्यों कि इस सृष्टि धरातल पर तो न्याय नहीं है। अन्यायी लोग संगठन बनाकर संगठित होकर राजतंत्र पर सत्तारूढ़ होते हुए प्रजा पर भरपूर अन्याय, अत्याचार करते हैं। इनमें गरीब श्रेणी के अशिक्षित लोग उनके शिकार बनते हैं और न्यायिक न्याय करने वाले न्यायधीश विभिन्न- विभिन्न प्रलोभनों की इच्छाओं आकांक्षाओं से एवं पद प्रतिष्ठा धन वैभव के लोभ लालच से ग्रसित होकर अथवा सत्ता पक्ष की कठपुतली बनकर कभी- कभी प्राणों के भय से भी सत्य न्याय की थाली असत्यीय रूप स्वरूप धारी लोगों को परोस देते हैं। अर्थात्- जिन्हे कठोर दण्ड , कारावास , मृत्यु दण्ड दिया जाना चाहिए ? उन्हें जीवन दान , आनंद दान , सुख ऐश्वर्य वैभव भोगीय सुखदान देते हैं। और जो सत्य न्याय पाने के सत्पात्र हैं। उन्हे न्याय न मिलते हुए दुःख,पीड़ा, अन्याय अत्याचारियता के वह पुनः शिकार होते हैं । उन्हे भयाक्रांति स्थितियों के सहने हेतु व घुट घुट कर मरने के लिए छोड़ देते हैं। तथा सत्य साक्ष्य न दे पायें उन्हें जान से भी मार देते हैं। वाह री ! देश की विडम्बना ? और वाह री भारत को विश्व गुरु बनाने वालों की कल्पना ?

– डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”

भारत तेरी अजब कहानी , दुःख ही दुःख तेरे जीवन में सुख की नहीं नाम निशानी । भारत तेरी अजब कहानी ॥

लोकतंत्र की छाती पर बैठा ,पैर गड़ाए नेता अभिमानी । भारत तेरी अजब कहानी ॥

मेरा भारत महान । जिसके नेता चोर और अधिकारी बेेेेेईमान । वो है मेरा भारत महान । ।

– साभार रचयिता डा० रमेश चन्द्र जी गुप्त

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