तुम्हारे मत की प्रजातंत्रीय व्यवस्था में अति महत्वपूर्ण भूमिका है मतदान अवश्य करें।
रिपोर्ट: डा० बनवारी लाल पीपर ” शास्त्री “
भारत संघ में भारत के आजाद होने के बाद यह व्यवस्था भारतीय संविधान अन्तर्गत भारत के व्यस्क पुरुष महिलाओं को अपना प्रतिनिधि अपने मत (वोट) के माध्यम सें चुनने का अधिकार मिला ।
जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधि ही अपने बहु संख्यीय आधार पर अपना नेता चुनकर शासन सत्ता का निर्माण करते हैं तथा
सभी भारतीय संविधान अंतर्गत राष्ट्र सेवा, जनसेवा, राष्ट्र एकता की, राष्ट्र प्रेम व पारस्परिक भाईचारा तथा अन्य जीवन उपयोगीय उपभोगीय सेवाओं की शपथ लेकर व्यवस्थाओं की शक्ति अपनों में पारस्परिक बांट कर सभी जनता द्वारा चुने गये भेजे गये प्रतिनिधि जन सेवाओं को विधिवत सेवाओं का रूप देकर रत होते हैं।
अभी यह कार्यक्रम पांच वर्षीय कार्यकालीय व्यवस्था अथवा नियम अन्तर्गत चल रहा है।
भारत में प्रत्येक व्यस्क व्यक्ति को मत देने (वोट डालने ) का अधिकार है।
भारतीय नागरिक अवश्य अपने इस अधिकार का प्रयोग करें ।
वर्तमान में चुनाव तिथियां राष्ट्र में घोषित हैं।
■ मतदान अवश्य करें ,
■वोट डालने अवश्य जायें ।
तुम्हारे मत की प्रजातंत्रीय (लोकतंत्रीय ) व्यवस्था में अतिमहत्वपूर्ण भूमिका है ।
इस परम सत्य को जानें व वोट डालने अवश्य जायें।
-डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”






