भारत देश की आज़ादी के साथ ही नपा उरई अस्तित्व में आ चुकी थी जो नगर को अब तक 19 नपा अध्यक्ष दे चुकी है| उरई की जनता अब अपना 20वां अध्यक्ष चुनेगी | उरई के पहले नपा चैयरमेन बाबू रामशंकर सक्सेना रहे जिन्होंने आज़ादी की साल 1947 से 1951 तक जिम्मेदारी संभाली जबकि नपा की पहेली नपा अध्यक्षा मीना वर्मा रही वही दूसरे नपा अध्यक्ष मथुरा प्रसाद यादव जी रहे जिनका कार्यकाल 15 मई 1951 से लेकर 29 नवम्बर 1953 तक रहे 30 नवम्बर 1953 से लेकर 29 नवम्बर 1957 तक बाबू बनवारी लाल त्तीसरे चैयरमेन रहे तो वही चौथे चैयरमेन के रूप में सुरेंद्र पल सिंह सेंगर रहे जो की 30 नवम्बर 1957 से लेकर 25 दिसंबर 1964 तक रहे गोपाल गंगाघाटभवे पाचवे चेयरमेंन चुने गए जिनका कार्यकाल 26 दिसंबर 1964 से 27 अप्रैल 1967 तक रहा| जबकि 28 अप्रैल 1967 से 27 जुलाई 1967 तक उपाध्यक्ष के हाथ में कार्यकारी के रूप में कमान रही | और कार्यकारी उपाध्यक्ष के रूप में कार्यभार चलाया गया फिर गिरजा कुमार दुबे ने 8 सितंबर 1967 से 25 फरबरी 1969 तक यह जिम्मेदारी चैयरमेन के रूप में संभाली उसके बाद एक बार फिर उपाध्यक्ष को कार्यकारी चैयरमेन की जिम्मेवारी मिली जो की 26 फरवरी 1969 से 29 दिसंबर 1969 तक रहा इसके बाद हुए चुनाव 30 दिसंबर 1969 से 13 मार्च 1971 तक मोतीलाल कौशल चैयरमेन रहे इसके बाद 13 मई 1971 से 4 जुलाई 1971 तक प्रसासन के हाथ में यह कमान रही और प्रशासक के अधीन यह नपा रही फिर 5 जुलाई 1971 से 2 जुलाई 1974 तक दलगंजन सिंह चैयरमैन रहे। इसके बाद 3 जुलाई 1974 से 8 अक्टूबर 1974 तक प्रशासक फिर बैठा, लेकिन इसके बाद दयानन्द गुप्ता ने नये चेयरमैन के रूप में 9 अक्टूबर 1974 से 4 जून 1977 तक जिम्मेवारी सँभाली, लेकिन 5 जून 1977 से फिर कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेवारी उपाध्यक्ष सौपनी पड़ी। जो कि 8 अगस्त 1977 तक रही। इसके बाद फिर अगला चेयरमैन नहीं चुना गया तो 10 अगस्त 1977 से 27 नवम्बर 1988 तक लम्बा कार्यकाल प्रशासक का रहा इसके बाद फिर 28 नवम्बर 1988 से 18 जनवरी 1994 तक भापजा के जिले के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व मन्त्री बाबूराम दादा का कार्यकाल रहा। इसके बाद एसएन प्रसाद ने 19 जनवरी 1994 से 27 जून 1994 तक नपा अध्यक्ष के रूप में जिम्मेवारी संभाली तो बी. बी. प्रसाद ने 28 जून 1994 से 8 दिसम्बर 1994 तक चेयरमैन बनकर इस पद को सुशोभित किया। इसके बाद एस. एस. सेंगर ने 9 दिसम्बर 1994 से 31 मार्च 1995 तक नया अध्यक्ष के रूप में जिम्मेवारी देखी हरेन्द्रवीर सिंह अगले नपा अध्यक्ष उरई के रहे जिनका कार्यकाल 1 अप्रैल 1995 से 1 दिसम्बर1995 तक रहा। इसके बाद मीना वर्मा ने 2 दिसम्बर 1995 से 1दिसम्बर 2000 तक पहली पालिकाध्यक्षा बनने का गौरव हासिल किया तो 2 दिसम्बर 2000 से 1 दिसम्बर 2005 तक युवा नेता विजय चौधरी पालिकाध्यक्ष रहे। इसके बाद प्रकाश चन्द्र तिवारी प्रशासक के रूप में रहे। जो कि 2 दिसम्बर 2005 से 22 जुलाई 2006 तक रहे। इसके बाद अगला कार्यकाल कुछ समय के लिये फिर प्रशासक के हाथों में रहा। जो कि ज्ञानेन्द्र सिंह एसडीएम के रूप में जिम्मेवारी देखते दिखे। इसके बादफिर साहब सिंह भी अगले प्रशासक के रूप में आये जिनका कार्यकाल 7 अगस्त 2006 से 15 नवम्बर 2006 तक रहा इसके बाद काशी प्रसाद वर्मा भाजपा के पालिकाध्यक्ष बने। जिनका कार्यकाल 11 नवम्बर 2006 से 21 नवम्बर 11 तक रहे। लेकिन इसके बाद लोकपाल सिंह तत्कालीन एडीएम को फिर से 21 नवम्बर 2011 से प्रशासक बने जो कि 15 जुलाई 2012 तक प्रशासक रहे इसके बाद हुये निर्वाचन में गिरजा चौधरी 16 जुलाई 2012 से पालिकाध्यक्षा बनी जिसके बाद अनिल बहुगुणा नगर पालिका के अध्यक्ष बने जिनका कार्यकाल जनवरी 2023 तक रहा। जिनका कार्यकाल पूरे समय ही विवादित रहा। सभासदों से लेकर ईओ तक से अनबन मीडिया की सुर्खिया बनी रहीं। अब 20 वे नये पालिकाध्यक्ष का निर्वाचन नगर की जनता करेगी। यह गरिमामयी और बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेवारी किसको मिलेगी यह अभी भविष्य के गर्भ में है।
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Kartikey Gubreley FocusNews24×7
कार्तिकेय गुबरेले(पत्रकार) जिला ब्यूरो चीफ क्राइम फोकस न्यूज 24×7 उरई (जालौन)




