भारत में चाहे जितने दिखावा जनित अच्छे से अच्छे लुभावने वाले कानून बना लिये जाये ? जब तक सत्ताधीश, न्यायधीश , शासन अधिकारी , शासन कर्मचारी व समाजीय जनता के व्यक्तिगत मन में कलुषितता , लोभ लालशा , व्यक्तिगत राग द्वेष, ईर्ष्या , जातीय घृणा , कुटिल कपटीपन व व्यक्ति द्वारा जो जहां पर है वहां वह अपने सत्य कर्तव्य दायित्व का निर्वहन पूर्ण परम सत्य पारदर्शिता पूर्ण ईमानदारी से नहीं करना ? जो परमेश्वरीय सत्ता / प्रकृतेश्वरीय सत्ता के दृष्टिदर्शन से पूर्ण अति पापमयी है और मेरे भी दृष्टिर्शन से पूर्ण परम सत्य अपराधमयी, पापमयी व दोषमयी है। परन्तु जब तक स्वयं के लिए ऐश्वर्यमयी भोग इच्छायें व पद प्रतिष्ठाओं की कामनायें तन, मन में निवास करेंगी । तब – तक राष्ट्र मानव ( नर नारी , स्त्री पुरुष ) पारस्परिक एक दूसरे का शोषण व राष्ट्र का पतन जारी रहेगा और देश में वीभत्स स्थितियां उत्पन्न होती रहेंगी तथा विष जैसी विषैली जानलेवा रूपरंगीय प्रत्येक मानव के तन-मन में हृदय को फाड़ देने वाले हृदय विदारक हर पल, हर क्षण दृश्य दिखाई देते रहेंगे अथवा दृष्टिगोचर होते रहेंगे ।
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान,
कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान !
सूरज न बदला, चाँद न बदला, ना बदला रे आसमान,
कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान !
आया समय बड़ा बेढंगा,आज आदमी बना लफंगा।
कहीं पे झगड़ा, कहीं पे दंगा,नाच रहा नर हो कर नंगा।
छल और कपट के हाथों अपना बेच रहा ईमान,
कितना बदल गया इंसान…
राम के भक्त, रहीम के बंदे,रचते आज फरेब के फंदे ।
कितने ये मक्कार, ये अंधे,देख लिए इनके भी धंधे ।
इन्हीं की काली करतूतों से हुआ ये मुल्क शमशान,
कितना बदल गया इंसान…
जो हम आपस में ना झगड़ते, बने हुए क्यों खेल बिगड़ते ?
काहे लाखों घर ये उजड़ते,क्यों ये बच्चे माँ से बिछड़ते ?
फूट-फूट कर क्यों रोते महामानवों के प्राण,
कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान !
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान,
कितना बदल गया इंसान, कितना बदल गया इंसान !
आज बहिनों की लाज लुट रही , भाइयों की जान पर बन रही
आज वर्तमान में ऐसा बन रहा अपना हिन्दुस्तान
सम्हलो , सुधरो पहिचानो अपने सत्य आन पर जान देने वाले अपने पूर्वजों का मान
छल , छद्म , झूठ , पाखण्ड से अलग हटो तभी बचेगी भारत की शान
देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान
कितना बदल गया इंसान , कितना बदल गया इंसान |
– डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”



