नगर पालिका की लापरवाही: करीबन 12 लाख में भरे गड्ढे, 15 दिन में ही सड़क हुई बदहाल

रेलवे स्टेशन के बाहर के गड्ढे उखड़ने लगे।

उरई की जनता को राहत देने के नाम पर नगर पालिका ने करीबन 12 लाख रुपये खर्च कर 1.5 किमी सड़क पर गड्ढे भरवाए, लेकिन यह काम महज 15 दिन भी नहीं टिक पाया। शहीद भगत सिंह चौराहा से स्टेशन रोड और राठ रोड पुल तक की यह सड़क अब फिर से गड्ढों से भर गई है। कहीं पुराने गड्ढे उभर आए हैं, तो कहीं नए गड्ढे बन गए हैं। इस गैरजिम्मेदाराना कार्य ने नगर पालिका की कार्यशैली और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अनुराधा टॉकीज के पास गड्ढे नहीं भरे गए।

गुणवत्ता की अनदेखी और जनता से खिलवाड़

 

नगर पालिका ने इस काम में गुणवत्ता मानकों की पूरी तरह अनदेखी की। नाम न छापने की शर्त पर एक जूनियर इंजीनियर ने खुलासा किया कि करीबन 12 लाख रुपये में गड्ढे भरने के बजाय सड़क का नवीनीकरण किया जा सकता था। पीडब्ल्यूडी के मुताबिक, इस बजट में सड़क का पुनर्निर्माण संभव था, जो वर्षों तक टिकता। लेकिन नगर पालिका ने जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग करते हुए सिर्फ दिखावे के लिए जल्दबाजी में गड्ढे भरवाए।

 

भ्रष्टाचार की बू, कार्रवाई से बचने की कोशिश

 

24 से 26 नवंबर के बीच आनन-फानन में गड्ढे भरवाने का काम किया गया ताकि उच्च अधिकारियों की फटकार और कार्रवाई से बचा जा सके। लेकिन 15 दिन में ही सड़क की दुर्दशा ने इस काम में हुए भ्रष्टाचार और लापरवाही को उजागर कर दिया। इस गैरजिम्मेदाराना कार्य का खामियाजा अब शहर की जनता भुगत रही है, जिन्हें खराब सड़कों पर चलने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।

 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

 

विशेषज्ञों का कहना है कि मानकों के अनुसार गड्ढे भरने का कार्य नहीं किया गया। सामग्री की गुणवत्ता खराब थी और निर्माण प्रक्रिया में भी कोताही बरती गई। यदि नगर पालिका ने सही तरीके से बजट का उपयोग किया होता, तो यह समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो सकती थी।

 

जनता के साथ धोखा, जिम्मेदार कौन?

 

यह मामला साफ तौर पर नगर पालिका की नाकामी और भ्रष्टाचार को उजागर करता है। जनता के पैसे से ऐसी खराब गुणवत्ता का काम करना न सिर्फ धोखा है, बल्कि यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

मांग: जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो

 

1. दोषियों पर सख्त कार्रवाई: इस काम के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर जांच कर कार्रवाई हो।

 

 

2. पारदर्शिता: सड़क निर्माण के कार्यों में खर्च का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।

 

 

3. स्थायी समाधान: गड्ढे भरने जैसे अस्थायी उपायों के बजाय सड़क का नवीनीकरण किया जाए।

 

 

 

यदि प्रशासन ने अब भी जनता की आवाज नहीं सुनी, तो यह सिर्फ सड़कों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था का भी पतन साबित होगा। जनता को ठगने वालों को सजा देना जरूरी है।

 

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कार्तिकेय गुबरेले(पत्रकार) जिला ब्यूरो चीफ क्राइम फोकस न्यूज 24×7 उरई (जालौन)