इन लोगों का नैतिक अपने कर्म कर्तव्यदायित्व पालन से मुंह मोड़ना आम बात है । मैं डा० बनवारीलाल पीपर “शास्त्री” स्वयं अपने निवास के सामने से कई दिनों से न झड़ा हुआ कूड़ा, फैला हुआ कूड़ा मैंने स्वयं झाड़कर इकट्ठा करने के उपरांत सफाईकर्मियों से कूड़ा उठाने का आग्रह करने के बाद भी उसकी अनदेखी करना, अनसुनी कर देना, न सुनना, लापरवाही करते हुए कूड़ा न उठना न उठाना यह सब आज के आदमी का अथवा उनका चरित्र बन गया है। गुण्डा एलीमेन्ट , पार्टियों के नेता, पावरफुल आदमी , धन्नासेठ इन सबका काम व्यक्तिगत रुचि लेकर करना अब इनके कामों को करने में लोगों द्वारा घासफूस डाल देना अथवा पावर शक्ति की दबंगई के डर से उनकी साफ सफाई करते रहना यह हाल है आज के सफाई कर्मियों का । शान्त व्यक्ति सीधा सरल होना व किसी का नुकसान नहीं चाहना अनुनय विनय से काम करने की कहना ऐसे प्रकृति धारी व्यक्ति को आज के ज्यादातर लोग बेवकूफ समझने लगे हैं। क्या ? अब अराजकता अन्याय अत्याचार कर्तव्य विहीनता अपने कर्तव्यों का सही दायित्वों का निर्वहन न करना कर्म कर्तव्य का स्वरूप बन जायेगा । क्या ? अब बातों व आश्वासन पर काम चलेगा धरातल पर नहीं। आज के कर्मचारी व्यक्ति को मात्र अधिकार याद रहेगा और वह भी अपने सत्कर्तव्य दायित्व को जिसका पारिश्रमिक भी कर्मचारी को शासन द्वारा शासकीय व्यवस्था अन्तर्गत दिया जाता है। जिससे कर्मचारी का घर परिवार भरपेट रोटी खाता है। क्या ? अब वह सब सत्य नैतिकीय व आत्मीय दायित्व यह सब ठंडे बस्ते में डाल दिये जायेंगे बस हवा हवाई कागजीय स्वरूपीय कार्य होंगे । लोग सोचे ? कर्मचारी अधिकारी सोचें ? विचारें और सत्य को धता न बतायें अन्यथा परमेश्वर की मार बहुत बुरी होती है। कहते हैं कि “उसकी लाठी में आवाज भी नहीं होती है और वह काम कर देती है। ” इसलिये हे मानवों सुधरो सम्हलो और सत्य का सत्य से पालन करो ।
– डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”





