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मानसिक विकृतियों का बड़ा कारण: आलस्य और कर्महीन जीवनशैली – डॉ. बनवारी लाल पीपल “शास्त्री”

आलस्य, अकर्मण्यता और कर्महीन जीवनशैली आज के समय में कई लोगों के जीवन में गहराई से घर करती जा रही हैं।

अपने तन-मन, बुद्धि और विवेक पर आरामतलबी और हरामखोरी जैसे नकारात्मक गुणों को लादकर ऊंचाइयों पर पहुंचने, धनवान बनने या अत्यधिक सफलता की केवल खयाली योजनाएं बनाने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।

बिना मेहनत, बिना श्रम और बिना कर्म के केवल सपने देखना ही कई व्यक्तियों की दिनचर्या बनता जा रहा है।

वरिष्ठ चिंतक और समाजसेवी फोकस न्यूज 24×7 के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. बनवारी लाल पीपल “शास्त्री” बताते हैं कि ऐसी सोच व्यक्ति को धीरे-धीरे मानसिक विकृति की ओर ले जाती है।

लंबे समय तक केवल कल्पनाओं में जीने वाले लोग वास्तविकता से कटने लगते हैं, जिससे मानसिक तनाव, असामान्य व्यवहार और कई मानसिक रोग जन्म ले लेते हैं। यहाँ तक कि व्यक्ति सामान्य मनोस्थिति से हटकर गंभीर मानसिक असंतुलन का शिकार भी हो सकता है।

डॉ. पीपल के अनुसार, मानसिक विकृति से ग्रसित व्यक्ति वास्तविकता, सत्य और अपने हित की बातें सुनना-मानना छोड़ देता है। सही मार्गदर्शन और सलाह को भी वह अनदेखा कर देता है। इस कारण रोग समय के साथ और अधिक जटिल हो जाता है।

वे बताते हैं कि ऐसे रोगियों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख, सही दिशा-निर्देशों का पालन और परिवार की भावनात्मक सहानुभूति ही वापस सामान्य जीवन की ओर ले जा सकती है। परिवार द्वारा मधुर व्यवहार, बिना दबाव समझाना और सहयोग देना सुधार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डॉ. पीपल लोगों से अपील करते हैं कि कर्मठता, श्रम, अनुशासन और सकारात्मक प्रयास ही मानसिक स्वास्थ्य और जीवन सुधार का मार्ग है। खाली सपनों पर नहीं, बल्कि कर्म पर आधारित जीवन ही व्यक्ति को सफलता और मानसिक संतुलन की ओर ले जाता है।

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