Author: Banwari Lal Shastri

असत्य का वरण व सत्य का त्याग रिपोर्ट:डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री” व्यक्ति की नैतिक पतनीय मानसिकता, मनोसोच मात्र निज सुख स्वार्थ में अन्धे , बे-ईमान…

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सत्य तत्त (सार ) वेत्ता महामानव , राष्ट्रकवि श्री मैथली शरण जी गुप्त एवं महामानव सत्य तत्त वेत्ता श्री रामधारी सिंह जी ‘दिनकर’ की परम सत्य…

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आत्मवत् सर्वभूतेषु रिपोर्ट:  -डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री” मानव शरीरधारी रूप विद्वद जनीय त्यागीय तपस्वीय निम्न वर्णित पालनीय , धारणीय , माननीय ब्राह्मण स्वरूपीय सत्य आचार …

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परमपिता परममाता सर्वेश्वर / सर्वेश्वरी से उनकी जीव प्राणी मानव ( नर नारी , स्त्री पुरुष ) की उनसे सत्य प्रियता सत्य प्रेम उनकी सत्य साधना…

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पार्ट-2 सत्य तत्त (सार) वेत्ताओं के दृष्टिदर्शन सोचनीय विचारनीय प्रश्न ?  “ईश्वर अंश जीव अविनाशी ” ( श्री रामचरित मानस ) जब ईश्वर का अंश है…

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समान सृष्टि रचयिता के मानव रचना में पारस्परिक छूत अछूत  का भेद, पास और दूरी का भेद वर्गीकरण, जातीय स्वरूप का न ही उचित व सत्य…

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पार्ट : 2 एक सत्य ईश्वर भक्त की परमेश्वर विषय पर शाश्वत् प्रत्यक्ष पर शंका ? और उसका समाधान निम्न शब्दों में व्यक्त है। रिपोँट -डा०…

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पार्ट : 1 ईश्वर क्या है ? कहाँ है ? जानो उस एकेश्वर का प्रकृति स्वरूप तत्वों में जो पांच ( क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा…

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ईश्वर का भक्त कहलाने वाला स्वयं अपना आत्म आकलन कर सकता है कि वह आस्तिक है या नास्तिक ।  रिपोर्ट: डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री व्यक्ति…

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उपरोक्त सत् सद् मानवों ने महामानव तक की यात्रा सर्व काल्याणीय , उपयोगीय , उपभोगीय सुख शान्ति , आनंददायी सृष्टि मानव (नरनारी , स्त्रीपुरुष ) जीव,…

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