Author: Banwari Lal Shastri

जिस मनुष्य ( नर नारी , स्त्रीपुरुष) का जीवन जीने का कोई एक सत्य लक्ष्य उद्देश्य नहीं होता वह ज्यादातर  दिग्भृमीय भ्रांतियों का शिकार होकर कोई…

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मेरी प्रिय साहसी बेटी नेहा सिंह राठौर तुम्हारे आत्मायी सत्य, यथार्थ हृदयी सत्य और संसार समाज के सर्व वर्णीय मानव सर्वहितीय सत्य एवं राष्ट्र के अभावग्रस्त,…

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यह वर्णीय ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य और शूद्र जातिगत वर्गीकरण राष्ट्र में नित्य प्रतिरोज तमान विसंगतियां व्यक्ति में पारस्परिक राग द्वेष विद्रोह विषमताएं उत्पन्न कारक…

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श्री बुद्ध प्राकट्योत्सव पर विशेष : नमो श्री बुद्ध , श्री बुद्धि , श्री विवेकाय नमः राजकुमार सिद्धार्थ को नगर भ्रमण पर संसारी व्यक्तियों की कष्ट…

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मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति ( नर नारी , स्त्री पुरुष ) का घर परिवार का या मंदिर,मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा का भोग , प्रसाद , आहार,भोजन,…

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व्यक्ति (नर-नारी , स्त्री-पुरुष) जहाँ जिस स्थान (जगह ) पर हो घर परिवार में , उसके अपने माता पिता, भाई बहिन, पति हो या पत्नी, पुत्र…

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ईश्वर की प्रियता व उसको पाने का मार्ग विषम नहीं हो सकता है। संसारीय जीव , प्राणी ,मानव से विलग नहीं हो सकता है। समाज से…

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मानव ( नर नारी , स्त्री पुरुष) गृहस्थीय आस्थायें आज वीभत्स स्वरूपीय खतरे में आ गयी हैं । एक दूसरे द्वारा अविश्वासीय रुप में जान लेना…

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