Author: Banwari Lal Shastri

उस महान व्यक्तित्व को अश्रु पूर्ण श्रद्धा सुमन अर्पित वह फिल्म नगरी में अपने गुण स्वभाव सीधापन सरल व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे उनकी…

Read More

धूर्त पाखण्डियों के साथ , झूठ फरेबीय संरचनाकारों, प्रवचनकारों, रचनाकारों के साथ इस सृष्टि धरातल पर परमेश्वरीय प्रकृतिस्वरूपा पितृ मातृ सत्ता ने अपनी रचना में जैसे…

Read More

लायें हैं हम तूफान से कश्ती निकाल के । इस देश को रखना सदा , संकट में डाल के I सिखलाते रहो जनता को उल्आ ही…

Read More

उपरोक्त शास्त्रोक्त सत्य वचन यह पूर्ण परम सत्य रूप में सिद्ध करते हैं । कि यह ऊंच नीच ,छोटी बड़ी वर्णगत व्यवस्था परम सत्ता सर्वोच्च सत्ता…

Read More

संसार , जीवन , उच्चवर्ण , निम्नवर्ण विडम्बना समान  क्रिया कलापीय मानव को असमानीय बना देना । जातीय घृणीय भेद का सृजन कर देना । इससे…

Read More

हे मेरे परम सत्य  ” ईश्वर अंश जीव अविनाशी ”  के नाते  “आत्मवत् सर्वभूतेषु ” के नाते  “वसुधैव कुटुम्बकम” के नाते आत्मीय जनों, आत्मीय बन्धुओं , आत्मीय माताओं,…

Read More

हे विश्व, राष्ट्र, समाज के लोगों (नर नारियों, स्त्री पुरुषों) जागो ? धर्म, ईश्वर पूजा, साधना, आराधना, त्याग, तपश्चर्या जो यथार्थ व पूर्ण परमसत्य है। उसको…

Read More

आज शासकीय तन्त्र में अथवा सत्ता तंत्र में अपराधी तत्वों का वर्चस्व  । इसे रोकने के लिए कोई कानून नियम नीति नैतिकता युक्त न बन पाने…

Read More

जब तक व्यक्ति ईश्वरीय / प्रकृति स्वरूपीय नियम नीति आचार विधान से नहीं चलता ? तब तक गीता, रामायण , कुरान , बाईबिल, गुरुग्रन्थ साहिब ,…

Read More