Author: Banwari Lal Shastri

सामाजिक जनसमुदाय के प्रति इतनी अन्यायपूर्ण अत्याचारीय जातिगत वर्चस्व, पद प्रतिष्ठागत वर्चस्व का इतना प्रभाव ? उन्नाव कांड : न्याय व्यवस्था पर सवाल, सत्ता संरक्षित अपराधों…

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संवैधानिक मूल्यों के क्षरण और मुफ्तखोरी की संस्कृति से डगमगाता सामाजिक ढांचा विशेष टिप्पणी | सामाजिक–राजनीतिक विमर्श डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री ” देश में संवैधानिक…

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1 . क्रूर (संवेदन विहीन ) ना आत्मीयता, न मानवता किसी भी कार्य का सही गलत का आकलन न करते हु  किसी की भी जान लेने…

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मानसिक विकृतियों का बड़ा कारण: आलस्य और कर्महीन जीवनशैली – डॉ. बनवारी लाल पीपल “शास्त्री” आलस्य, अकर्मण्यता और कर्महीन जीवनशैली आज के समय में कई लोगों…

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जब व्यक्ति अपना सत्य पथ भूल कर असत् कर्मों में रत हो जाता   डा० बनवारी लाल पीपर “शास्त्री” का विचार  डॉ. बनवारी लाल पीपर “शास्त्री”…

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आज दहेज के लालच में सामाजिक लोगों की मनो सोचीय खोखली मान्यताएं (क्योंकि आचार चरित्र कुछ और ,और वाह्य भाव विचारीय प्रदर्शनीय नाटक मीठे बोलने मधुरता…

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सृजनसत्ता ने जो कर्ता, धर्ता , भर्ता , जीवन चेतना समापन कर्ता है। उसने सबके साथ पूर्ण परम सत्य ( जीव जन्तु, प्राणी ,पशुपक्षी ), मानव…

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हे मेरे प्यारे आत्मिक भाइयों, माताओं, बहिनों , बेटियों ,  गृहलक्ष्मियों पाप आचार अपनाकर , कुकर्मों की फांश में बांधकर एक दूसरे को अपने ही आत्मिक…

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बिन काज आज महाराज लाज गई मेरी। दु :ख हरौ द्वारिका नाथ शरण मैं तेरी ॥ दु:शासन वंश कठोर महा दुःख दायी। कर पकड़त चीर लाज…

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