Author: Banwari Lal Shastri

इन लोगों का नैतिक अपने कर्म कर्तव्यदायित्व पालन से मुंह मोड़ना आम बात है । मैं डा० बनवारीलाल पीपर “शास्त्री” स्वयं अपने निवास के सामने से…

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हे मूर्ख मानव ! (नर-नारी, स्त्री-पुरुष ) क्यों अपना दुःखदर्द लिये धूर्त, पाखण्डी, अन्यायी अत्याचारियों के चक्करों में मारे-मारे कष्ट उठाते फिर रहे हो ? उनके…

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व्यक्ति (बालक – बालिकाएं , नर- नारी , स्त्री-पुरुषों ) को अपने घर परिवार, माता-पिता के वर्तमान परिवेश, वर्तमान परिस्थितियों का सत्य आकलन करते / रखते…

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राजसत्ता राजतंत्र गठन में भाग लेने वाले मानवों को वेतन विहीन , भत्ते विहीन प्रजा सेवा / परमात्मा सेवा घोषित करते हुए निःशुल्क त्याग मयी पूर्ण…

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जिस मनुष्य ( नर नारी , स्त्रीपुरुष) का जीवन जीने का कोई एक सत्य लक्ष्य उद्देश्य नहीं होता वह ज्यादातर  दिग्भृमीय भ्रांतियों का शिकार होकर कोई…

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मेरी प्रिय साहसी बेटी नेहा सिंह राठौर तुम्हारे आत्मायी सत्य, यथार्थ हृदयी सत्य और संसार समाज के सर्व वर्णीय मानव सर्वहितीय सत्य एवं राष्ट्र के अभावग्रस्त,…

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यह वर्णीय ब्राह्मण , क्षत्रिय , वैश्य और शूद्र जातिगत वर्गीकरण राष्ट्र में नित्य प्रतिरोज तमान विसंगतियां व्यक्ति में पारस्परिक राग द्वेष विद्रोह विषमताएं उत्पन्न कारक…

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श्री बुद्ध प्राकट्योत्सव पर विशेष : नमो श्री बुद्ध , श्री बुद्धि , श्री विवेकाय नमः राजकुमार सिद्धार्थ को नगर भ्रमण पर संसारी व्यक्तियों की कष्ट…

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मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति ( नर नारी , स्त्री पुरुष ) का घर परिवार का या मंदिर,मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा का भोग , प्रसाद , आहार,भोजन,…

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