Author: Banwari Lal Shastri

करके देख लो ईश्वरीय सत्य का आचार यही है , विश्व में मानव-मानव में शान्ति का मात्र मूल आधार यही है ■ आत्मा का सत्य हृदय…

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जब सत्यवादी को सत्य आचारीय, निश्छल, निर्मल , निष्कपट अभेदीय, मानवता के पुजारियों को बर्दाश्त नहीं किया गया । ■ और कुटिल-कपटी, साम , दाम, दण्ड…

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भारत देश में राजतंत्र, शासनसत्ता के बीच में सोशल मीडिया देश के चौथे स्तम्भ पत्रकारिता क्षेत्र में श्री रवीश कुमार जी एक आनेस्ट, ईमानदार , निर्मोही,…

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मुझे अपने द्वारा नौकरी व्यवसाय से किये गये उपार्जित धन सम्पत्ति का पता है अथवा पता होता है। कि मैने किन सात्विक-असात्विक स्रोतों से नैतिक अनैतिक…

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इन लोगों का नैतिक अपने कर्म कर्तव्यदायित्व पालन से मुंह मोड़ना आम बात है । मैं डा० बनवारीलाल पीपर “शास्त्री” स्वयं अपने निवास के सामने से…

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हे मूर्ख मानव ! (नर-नारी, स्त्री-पुरुष ) क्यों अपना दुःखदर्द लिये धूर्त, पाखण्डी, अन्यायी अत्याचारियों के चक्करों में मारे-मारे कष्ट उठाते फिर रहे हो ? उनके…

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व्यक्ति (बालक – बालिकाएं , नर- नारी , स्त्री-पुरुषों ) को अपने घर परिवार, माता-पिता के वर्तमान परिवेश, वर्तमान परिस्थितियों का सत्य आकलन करते / रखते…

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राजसत्ता राजतंत्र गठन में भाग लेने वाले मानवों को वेतन विहीन , भत्ते विहीन प्रजा सेवा / परमात्मा सेवा घोषित करते हुए निःशुल्क त्याग मयी पूर्ण…

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